🛠️ Drills and Drilling Machines (ड्रिल्स और ड्रिलिंग मशीनें)

अध्याय के उद्देश्य (Objectives): 🎯

इस लेसन (lesson) के अंत में आप निम्नलिखित कार्यों को करने में सक्षम होंगे:

  • Drills के कार्यों (functions) के बारे में बताना।
  • Drill के विभिन्न भागों (parts) के नाम बताना।
  • Drill bit holders के नाम बताना।
  • Countersinking bits के उपयोगों के बारे में बताना।

ड्रिल क्या है? (Drill): 🔩

Drilling एक ऐसी प्रक्रिया (process) है जिसमें ड्रिल का उपयोग करके वर्कपीस (workpieces) पर छेद (holes) बनाए जाते हैं।


ड्रिल के भाग (Parts of a Drill – Fig 1): ⚙️

एक ड्रिल में निम्नलिखित महत्वपूर्ण भाग होते हैं:

  1. Tang (टैंग)
  2. Shank (शैंक)
  3. Body (बॉडी)
  4. Flute (फ्लूट)
  5. Land (लैंड)
  6. Point angle (पॉइंट एंगल)
  7. Cutting lip (कटिंग लिप)
  8. Chisel edge (चिज़ल एज)

मुख्य भागों का विवरण (Detailed Description):

1. Tang (टैंग): 🧩 टैंग ड्रिल का वह भाग है जो ड्रिलिंग मशीन के spindle (स्पिंडल) के स्लॉट (slot) में फिट होता है।

2. Shank (शैंक): 🏗️ यह ड्रिल का ड्राइविंग एंड (driving end) है जिसे मशीन पर फिट किया जाता है। शैंक मुख्य रूप से दो प्रकार (types) के होते हैं:

  • Taper shank (टेपर शैंक): इसका उपयोग बड़े व्यास (larger diameter) के ड्रिल्स के लिए किया जाता है।
  • Straight shank (स्ट्रेट शैंक): इसका उपयोग छोटे व्यास (smaller diameter) के ड्रिल्स के लिए किया जाता है।

शैंक की विशेषताएँ (Shank Specifications):

  • शैंक पैरेलल (parallel) या टेपर्ड (tapered) हो सकते हैं (जैसा कि चित्र 2 और 3 में दिखाया गया है)।
  • पैरेलल या स्ट्रेट शैंक वाले ड्रिल्स छोटे साइज में बनाए जाते हैं, जो 12mm (1/2 इंच) व्यास (diameter) तक होते हैं। इनमें शैंक का व्यास फ्लूट्स (flutes) के समान ही होता है।
  • टेपर शैंक ड्रिल्स (Taper shank drills) 3mm (1/8 इंच) से लेकर 50mm (2 इंच) व्यास तक के साइज में उपलब्ध होते हैं।

3. Body (बॉडी): 📐 बॉडी, पॉइंट (point) और शैंक (shank) के बीच का हिस्सा होता है।

4. Flutes (फ्लूट्स): 🌀 फ्लूट्स वे स्पाइरल खांचे (spiral grooves) होते हैं जो ड्रिल की पूरी लंबाई तक बने होते हैं। 

फ्लूट्स की मदद (The flutes help): (नोट: चित्र में इसके आगे का टेक्स्ट नहीं है, लेकिन सामान्यतः ये चिप्स को बाहर निकालने और कूलेंट को कटिंग एज तक पहुँचाने में मदद करते हैं।)

  • कटिंग एडजेस (To form the cutting edges): ड्रिल के सिरों को काटने के लिए धार दी जाती है।
  • चिप्स को बाहर निकालना (To curl the chips): चिप्स (छिलकों) को मोड़ने और उन्हें छेद से बाहर निकालने के लिए फ्लूट्स (flutes) दिए जाते हैं (Fig 4)।
  • कूलेंट का प्रवाह (Flow of coolant): कूलेंट को कटिंग एड्ज (cutting edge) तक पहुँचने के लिए जगह दी जाती है।

 

लैंड/मार्जिन (Land/margin): लैंड/मार्जिन वह संकरी पट्टी (narrow strip) है जो फ्लूट्स की पूरी लंबाई तक फैली होती है। ड्रिल का व्यास (diameter) इसी लैंड/मार्जिन के सिरों के बीच मापा जाता है।

बॉडी क्लीयरेंस (Body clearance): बॉडी क्लीयरेंस ड्रिल की बॉडी का वह हिस्सा है जिसका व्यास (diameter) कम कर दिया जाता है ताकि ड्रिल और छेद के बीच घर्षण (friction) कम हो सके। ⚙️

वेब (Web): वेब वह धातु का स्तंभ (metal column) है जो फ्लूट्स को अलग करता है। यह शैक (shank) की तरफ जाते समय धीरे-धीरे मोटाई में बढ़ता जाता है।

ड्रिल बिट होल्डर (Drill Bit Holder) 🛠️

  • ड्रिल चक (Drill chuck): स्ट्रेट शंक (straight shank) वाले ड्रिल बिट्स को पकड़ने के लिए ड्रिल चक का उपयोग किया जाता है, जो मुख्य स्पिंडल (main spindle) से जुड़ा होता है (Fig 5)।
  • स्लीव (Sleeve): इसका उपयोग तब किया जाता है जब ड्रिल बिट का टेपर (bit taper) और स्पिंडल होल (spindle hole) का आकार मिलाना हो (Fig 6)।
  • सॉकेट (Socket): सॉकेट का उपयोग तब होता है जब मुख्य स्पिंडल की लंबाई बहुत कम हो और बिट को बार-बार बदलना पड़ता हो (Fig 7)।
  • टैपर शंक ड्रिल्स (Taper shank drills) को मशीन के Taper Sockets में रखा जाता है (Fig 8)।

टैंग और कूलेंट का महत्व (Importance of Tang and Coolant)

  • टैंग (Tang): टैपर शंक ड्रिल पर बनी टैंग (Tang) ड्रिलिंग के बाद ड्रिल को सॉकेट से आसानी से निकालने में मदद करती है। इसके लिए ड्रिफ्ट (Drift) का उपयोग किया जाता है (Fig 9)। साथ ही, टैंग ड्रिल को सॉकेट के अंदर घूमने से भी रोकती है।
  • कूलेंट (Coolant): कटिंग टूल और जॉब (Job) को ठंडा रखने के लिए कूलेंट का उपयोग बहुत जरूरी है ताकि टूल की धार खराब न हो। 💧

🔩 ड्रिलिंग मशीनें (Drilling Machines)

पाठ के उद्देश्य (Objectives): इस पाठ के अंत में आप निम्न चीज़ें सीख पाएंगे:

  1. हैंड ड्रिलिंग मशीनों के प्रकार और उनके उपयोग बताना।
  2. बेंच और पिलर ड्रिलिंग मशीन के भागों की पहचान करना।
  3. मशीन वाइस (Machine Vice) की विशेषताओं को समझना।

ड्रिलिंग का परिचय (Introduction to Drilling)

शीट मेटल (Sheet metal) में छेद करने के लिए सॉलिड पंच (solid punches) का उपयोग करना एक धीमी और अक्षम (inefficient) प्रक्रिया है। जब हम भारी सामग्री (heavy material) पर काम करते हैं, तो ड्रिलिंग करना अनिवार्य हो जाता है। छेद हाथ से या मशीन द्वारा किए जा सकते हैं। हाथ से ड्रिलिंग के लिए Hand Drilling Machine (Fig 1) या Electric Hand Drilling Machine (Fig 2) का उपयोग किया जाता है।

  • ट्विस्ट ड्रिल (Twist drills): इनका उपयोग कटिंग टूल के रूप में किया जाता है। हैंड ड्रिल से आमतौर पर 6.5 mm व्यास तक के छेद किए जा सकते हैं।
  • पोर्टेबल इलेक्ट्रिक ड्रिल: यह एक बहुत ही पावरफुल टूल है। इसमें पिस्टल ग्रिप हैंडल (Pistol grip handle) होता है जिसे पकड़ना आसान होता है (Fig 2)।

सावधानियां (Precautions to be Observed) ⚠️

ड्रिलिंग करते समय इन बातों का ध्यान जरूर रखें:

  1. सुनिश्चित करें कि छेद की जगह सही हो और सेंटर पंच (Centre punch) से निशान लगाया गया हो।
  2. ड्रिल को चक (Chuck) में बिल्कुल सेंटर में फिट करें।
  3. काम करने वाली वस्तु (Workpiece) को Vice या G-clamp में मजबूती से पकड़ें।
  4. ड्रिल शुरू करने के बाद उसकी सेंटरिंग चेक करें। यदि आवश्यक हो, तो दोबारा सेंटर पंच का उपयोग करें।
  5. ड्रिलिंग के दौरान दबाव (Pressure) हल्का और एक समान (even) होना चाहिए।

1. हैंड ड्रिलिंग मशीन (Hand Drilling Machine) 🖐️

जैसा कि Fig 1 में दिखाया गया है, यह मशीन पूरी तरह से मैन्युअल है और हाथों से चलाई जाती है। इसके मुख्य भाग (Parts) नीचे दिए गए हैं:

  • Fixed Handle (फिक्स्ड हैंडल): मशीन को स्थिरता प्रदान करने के लिए।
  • Small Handle (छोटा हैंडल): इसे घुमाकर ड्रिलिंग की जाती है।
  • Chuck Shell (चक शेल): ड्रिल बिट को पकड़ने वाला हिस्सा।
  • Jaws (जबड़े): जो ड्रिल बिट को मजबूती से जकड़ते हैं।

2. इलेक्ट्रिक हैंड ड्रिलिंग मशीन (Electric – Hand Drilling Machine) ⚡

Fig 2 में बिजली से चलने वाली हैंड ड्रिल मशीन दिखाई गई है। इसका उपयोग काम को तेजी से करने के लिए किया जाता है। इसके मुख्य पार्ट्स हैं:

  • Geared Key Chuck (गियर्ड की चक): ड्रिल बिट लगाने के लिए।
  • Chuck Key (चक की): चक को ढीला या टाइट करने की चाबी।
  • Trigger Switch (ट्रिगर स्विच): मशीन को चालू और बंद करने के लिए।
  • Handle (हैंडल): मशीन को पकड़ने के लिए।
  • Electric Cord (इलेक्ट्रिक कॉर्ड): बिजली की आपूर्ति के लिए।

🔩 ड्रिलिंग मशीनों के मुख्य प्रकार (Types of Drilling Machines)

वर्कशॉप में मुख्य रूप से तीन प्रकार की मशीनें उपयोग की जाती हैं:

  1. Sensitive bench drilling machine (सेंसिटिव बेंच ड्रिलिंग मशीन)
  2. The pillar drilling machine (पिलर ड्रिलिंग मशीन)
  3. The radial arm drilling machine (रेडियल आर्म ड्रिलिंग मशीन)

(नोट: चूँकि आप अभी कॉलम और रेडियल टाइप मशीनों का उपयोग नहीं करेंगे, इसलिए यहाँ केवल सेंसिटिव और पिलर टाइप मशीनों को समझाया गया है।)


3. सेंसिटिव बेंच ड्रिलिंग मशीन (Sensitive Bench Drilling Machine) 🏭

यह सबसे सरल प्रकार की मशीन है जिसे Fig 3 में दिखाया गया है। इसका उपयोग Light Duty Work (हल्के कार्यों) के लिए किया जाता है।

मुख्य विशेषताएँ:

  • यह मशीन 12.5mm diameter तक के छेद करने में सक्षम है।
  • ड्रिल बिट्स को सीधे मशीन स्पिंडल के Tapered hole में या चक (Chuck) में फिट किया जाता है।

Parts (चित्र के अनुसार):

  • Feed Handle (फीड हैंडल): ड्रिल को नीचे लाने के लिए।
  • Belt Guard (बेल्ट गार्ड): सुरक्षा के लिए।
  • Driving Motor (ड्राइविंग मोटर): पावर सप्लाई के लिए।
  • Column/Pillar (कॉलम/पिलर): मशीन का मुख्य खंभा।
  • Base (बेस): मशीन का आधार।
  • Work Table (वर्क टेबल): जहाँ जॉब को रखा जाता है।
  • Depth Gauge and Stop (डेप्थ गेज): छेद की गहराई मापने के लिए।

4. पिलर ड्रिलिंग मशीन (The Pillar Drilling Machine) 🏗️

यह सेंसिटिव बेंच ड्रिलिंग मशीन का ही एक Enlarged version (बड़ा रूप) है।

  • स्थापना (Mounting): ये मशीनें फर्श (Floor) पर मजबूती से लगाई जाती हैं।
  • उपयोग (Usage): इनका उपयोग Heavy duty work (भारी कार्यों) के लिए किया जाता है।
  • पावर (Power): इनमें बहुत शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर्स लगी होती हैं।
  • एडजस्टमेंट: बड़े आकार की मशीनों में वर्क टेबल को सेट करने के लिए Rack and pinion mechanism दिया जाता है, जिससे टेबल को ऊपर-नीचे आसानी से हिलाया जा सके।

✅ निष्कर्ष (Conclusion)

ड्रिलिंग मशीन का सही चुनाव कार्य की प्रकृति और छेद के व्यास (diameter) पर निर्भर करता है। हल्के काम के लिए बेंच ड्रिल और भारी काम के लिए पिलर ड्रिल सबसे उपयुक्त है।


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आशा है कि यह पाठ आपके लिए उपयोगी साबित होगा! किसी भी प्रश्न के लिए कमेंट बॉक्स में पूछें। 😊


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Instructor Note: 👨‍🏫

छात्रों को ड्रिल के विभिन्न भागों को समझाने के लिए चित्र (Fig 1) का उपयोग करें। उन्हें टेपर शैंक और स्ट्रेट शैंक के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझाएं कि कौन सा किस साइज के लिए उपयोग होता है। यह लेसन ITI Electrician (NSQF – Revised 2022) के पाठ्यक्रम के अनुसार अत्यंत महत्वपूर्ण है।