⚡ Primary Cells and Secondary Cells: ITI Electrician Theory Guide 🔋

नमस्ते छात्रों! आज हम Cells and Batteries के महत्वपूर्ण अध्याय के बारे में पढ़ेंगे। यह पाठ आपको Electrolysis और Faraday’s Laws की बुनियादी समझ देगा। 📘

🎯 पाठ के उद्देश्य (Objectives):

इस पाठ के अंत में आप निम्न विषयों को समझ पाएंगे:

  • विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव (Chemical effect of electric current) को बताना।
  • इलेक्ट्रोलेसिस के नियम (Laws of electrolysis) बताना।
  • इलेक्ट्रोप्लेटिंग के बुनियादी सिद्धांत (Basic principles of electroplating) बताना।
  • प्राइमरी सेल (Primary cells) के सिद्धांत और बनावट को समझना।
  • सेकेंडरी सेल (Secondary cells) जैसे Lead Acid, Nickel Iron और Nickel Cadmium की बनावट समझना।
  • प्राइमरी और सेकेंडरी सेल के बीच तुलना करना।

⚗️ विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव (Chemical effects of electric current)

‘कुछ ऐसे तरल पदार्थ (liquids) होते हैं जिनमें से विद्युत धारा (electric current) गुजारने पर रासायनिक परिवर्तन (chemical changes) होते हैं।’ इस प्रभाव को विद्युत धारा का Chemical Effect कहा जाता है। 🧪

उदाहरण (Applications): दैनिक जीवन में इसके उपयोग देखे जा सकते हैं; जैसे कि धातु की वस्तुओं पर निकेल या कॉपर की प्लेटिंग करना (Electroplating), सेल द्वारा E.M.F का उत्पादन करना आदि। यदि बैटरी के पॉजिटिव और नेगेटिव टर्मिनल से निकले दो तारों को नमक वाले पानी (Salted water) में डुबोया जाए, तो तारों के सिरों पर बुलबुले (bubbles) बनते देखे जा सकते हैं; यह सब रासायनिक प्रभाव के कारण होता है।


🌊 इलेक्ट्रोलेसिस (Electrolysis)

किसी तरल (liquid) या घोल (solution) में से विद्युत धारा गुजारने के कारण होने वाले रासायनिक परिवर्तनों की प्रक्रिया को Electrolysis (विद्युत अपघटन) कहा जाता है। ⚡


🧪 इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte)

‘वह तरल या घोल जो विद्युत धारा गुजरने के कारण अपने अंदर रासायनिक परिवर्तन महसूस करता है, उसे Electrolyte कहा जाता है’; जैसे कि नमक का पानी (salted water), अम्लीय (acidic) या क्षारीय (basic) घोल आदि।


🥢 इलेक्ट्रोड: एनोड और कैथोड (Electrodes: Anode and Cathode)

‘तरल में डूबी हुई दो सुचालक प्लेटें (conductor plates) जो करंट के गुजरने का रास्ता बनाती हैं, उन्हें Electrodes कहा जाता है।’

  • Anode (पॉजिटिव इलेक्ट्रोड): वह इलेक्ट्रोड जिससे करंट तरल में प्रवेश (enters) करता है। ➕
  • Cathode (नेगेटिव इलेक्ट्रोड): वह इलेक्ट्रोड जिससे करंट तरल (electrolyte) से बाहर निकलता (leaves) है। ➖

⚛️ आयन्स (Ions)

इलेक्ट्रोलेसिस के दौरान, इलेक्ट्रोलाइट के अणु (molecules) अपने घटकों में टूट जाते हैं जिन्हें Ions कहा जाता है।

  • Cations: जब दो इलेक्ट्रोड के बीच p.d. (Potential Difference) लगाया जाता है, तो धनावेशित आयन (positively charged ions) Cathode की ओर बढ़ते हैं।
  • Anions: ऋणावेशित आयन (negatively charged ions) Anode की ओर बढ़ते हैं। किसी इलेक्ट्रोड पर पहुँचने पर, एक आयन अपना चार्ज छोड़ देता है और आयन नहीं रहता। परमाणुओं (atoms) को आयनों में बदलने की प्रक्रिया को Ionization (आयनीकरण) कहा जाता है।

📏 इलेक्ट्रोकेमिकल इक्विवेलेंट (Electrochemical Equivalent – ECE)

एक कूलम्ब (one coulomb) बिजली द्वारा इलेक्ट्रोलेसिस के दौरान मुक्त (liberated) या जमा (deposited) हुए पदार्थ के द्रव्यमान (mass) को उस पदार्थ का Electrochemical Equivalent (ECE) कहा जाता है। ⚖️

  • Silver (चांदी) का ECE: 1.1182 मिलीग्राम/कूलम्ब होता है।

🔌 कूलम्ब (Coulomb)

कूलम्ब (C) विद्युत आवेश (Electric Charge – Q) या बिजली की मात्रा की इकाई है। Coulomb = Current (Ampere) × Time (Seconds)


###📜 फैराडे के इलेक्ट्रोलेसिस के नियम (Faraday’s Law of Electrolysis)

1. प्रथम नियम (First Law):

इलेक्ट्रोलेसिस के दौरान किसी भी इलेक्ट्रोड पर मुक्त या जमा हुए पदार्थ का द्रव्यमान (mass), इलेक्ट्रोलाइट से गुजरी हुई बिजली की मात्रा के समानुपाती (proportional) होता है। यदि अधिक करंट या अधिक समय तक करंट गुजारा जाए, तो जमा हुआ पदार्थ भी अधिक होगा।

सूत्र (Formula): $m \propto I$ $m \propto t$ $m \propto I \cdot t$ $m = Z \cdot I \cdot t$

जहाँ:

  • I = Current (Amperes में) ⚡
  • t = Time (Seconds में) ⏱️
  • m = मुक्त हुए पदार्थ का द्रव्यमान (Grams में) ⚖️
  • Z = स्थिरांक (Constant), जिसे ECE कहा जाता है।

2. दूसरा नियम (Second Law):

‘जब बिजली की समान मात्रा अलग-अलग इलेक्ट्रोलाइट्स से गुजारी जाती है, तो विभिन्न इलेक्ट्रोडों पर मुक्त हुए तत्वों की मात्रा उनके इलेक्ट्रो-केमिकल इक्विवेलेंट (ECE) के समानुपाती होती है।’

सूत्र (Formula): $Mass \propto E.C.E$ $M \propto Z$

जहाँ Z = इलेक्ट्रो-केमिकल इक्विवेलेंट।

फैराडे के नियमों के अनुसार: $m = Z \cdot I \cdot t$

  • I = Current in amperes (एम्पियर में करंट)
  • t = Time in seconds (सेकंड में समय)
  • Note: जमा हुआ द्रव्यमान (Mass deposited) m = Volume x Density (आयतन × घनत्व)

⚖️ समतुल्य भार (Equivalent Weight) का सूत्र:

$$\text{Equivalent weight (समतुल्य भार)} = \frac{\text{Atomic weight (परमाणु भार)}}{\text{Valency (संयोजकता)}}$$

Nickel का E.C.E. निकालने का तरीका: $$\text{E.C.E. of nickel} = \frac{\text{Equivalent wt. of nickel}}{\text{Equivalent wt. of silver}} \times \text{E.C.E. of silver}$$


📊 तत्वों के विद्युत-रासायनिक समकक्ष (Table for Electro-Chemical Equivalents of Elements)

| Element Name (तत्व का नाम) | Atomic Weight (परमाणु भार) | Valency (संयोजकता) | E.C.E (mg/c) | Chemical Equivalent (g/c) | | :— | :— | :— | :— | :— | | Hydrogen | 1.008 | 1 | 0.01045 | 1.008 | | Aluminium | 27.1 | 3 | 0.0936 | 9.03 | | Copper | 63.57 | 2 | 0.3293 | 31.78 | | Silver | 107.88 | 1 | 1.118 | 107.88 | | Zinc | 65.38 | 2 | 0.3387 | 32.69 | | Nickel | 58.68 | 2 | 0.304 | 29.34 | | Chromium | 52.0 | 3 | 0.18 | 17.33 | | Iron | 55.85 | 2 | 0.2894 | 27.925 | | Lead | 207.21 | 2 | 1.0738 | 103.6 | | Mercury | 200.6 | 1 | 2.0791 | 200.6 | | Gold | 197.0 | 1 | 2.0438 | 197 |

नोट: mg/c का मतलब है मिली-ग्राम प्रति कूलम्ब (milli-gram per coulomb)।


🚀 विद्युत अपघटन के अनुप्रयोग (Application of Electrolysis)

Electrolysis के मुख्य उपयोग निम्नलिखित हैं:

  1. Electroplating (इलेक्ट्रोप्लेटिंग): धातुओं पर परत चढ़ाना।
  2. Electro-refining of metals: धातुओं का शुद्धिकरण।
  3. Electrolytic capacitor: कैपेसिटर का निर्माण।
  4. Electrotyping: मुद्रण के लिए टाइप बनाना।
  5. Extraction of metals: अयस्कों से धातु निकालना।

✨ इलेक्ट्रोप्लेटिंग (Electroplating) क्या है?

Electrolysis (विद्युत अपघटन) द्वारा एक धातु की सतह पर दूसरी धातु की परत जमा करने की प्रक्रिया को Electroplating कहा जाता है। इसका उपयोग उत्पादों को आकर्षक दिखाने और जंग से बचाने के लिए किया जाता है। इसमें सस्ती धातुओं (जैसे लोहा) पर महंगी धातुओं (जैसे चांदी, निकल, सोना, क्रोमियम आदि) की परत चढ़ाई जाती है।


🛠️ इलेक्ट्रोप्लेटिंग के लिए शर्तें (Conditions for Electroplating)

किसी वस्तु पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग करने से पहले निम्नलिखित शर्तें पूरी होनी चाहिए:

  1. वस्तु की सतह रासायनिक रूप से साफ होनी चाहिए (यानी उस पर गंदगी, जंग या ग्रीस नहीं होनी चाहिए)।
  2. जिस वस्तु पर प्लेटिंग करनी है, उसे Cathode (कैथोड) बनाया जाना चाहिए।
  3. Anode (एनोड) उस धातु का होना चाहिए जिसकी परत चढ़ानी है, ताकि घोल (Solution) की सांद्रता स्थिर बनी रहे।
  4. जिस धातु की कोटिंग करनी है, उसे Electrolyte (इलेक्ट्रोलाइट) के घोल में होना चाहिए।

🏗️ इलेक्ट्रोप्लेटिंग का सेटअप

इलेक्ट्रोलाइट को लकड़ी के प्रबलित सीमेंट कंक्रीट टैंक (wooden reinforced cement concrete tank) में रखा जाता है जिसे “Vat” कहते हैं। Anode और वस्तु को तारों के जरिए घोल में लटकाया जाता है। करंट की वैल्यू को वस्तु के क्षेत्रफल के अनुसार एडजस्ट किया जाता है।


🧮 महत्वपूर्ण गणना सूत्र (Calculation Formulas)

  • M = ZIt
  • समय (Time) t = M / (IZ)
  • हम जानते हैं Volume (आयतन) = Area (क्षेत्रफल) x Thickness (मोटाई)
  • Thickness (मोटाई) = Volume / Area
  • Mass (द्रव्यमान) = Volume x Density
  • Density (घनत्व) = Mass / Volume (gm/cc)

📝 उदाहरण (Example 1):

यदि 0.5A के DC करंट द्वारा 3 मिनट 20 सेकंड में कैथोड पर 111.83 मिलीग्राम चांदी जमा होती है, तो चांदी के ECE की गणना करें।

समाधान (Solution):

  • t = 3 min 20 s = 200 s
  • M = 111.83 mg
  • फैराडे के नियम (Faraday’s law) से, M = ZIt
  • $Z = \frac{M}{It} = \frac{111.83}{0.5 \times 200}$
  • Z = 1.1183 mg/C ✅

🔋 प्लेटिंग के लिए आवश्यक करंट (Current required for plating)

इलेक्ट्रोप्लेटिंग के लिए हमेशा Low pressure Direct Current (DC) सप्लाई का उपयोग किया जाता है। उपयोग किया जाने वाला प्रेशर (Voltage) आमतौर पर 1 से 16 V के बीच होता है, जो प्लेटिंग की दर और इलेक्ट्रोलाइट की प्रकृति पर निर्भर करता है।

🛡️ इलेक्ट्रोप्लेटिंग में कैथोडिक प्रोटेक्शन (Cathodic Protection in Electroplating)

कैथोडिक प्रोटेक्शन (Cathodic Protection – CP) एक ऐसी तकनीक (technique) है जिसका उपयोग किसी धातु की सतह (metal surface) को इलेक्ट्रोकेमिकल सेल (electrochemical cell) का कैथोड (cathode) बनाकर उसके क्षरण या जंग (corrosion) को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। सुरक्षा का एक सरल तरीका यह है कि जिस धातु को सुरक्षित करना है, उसे आसानी से संक्षारित होने वाली बलिदानी धातु (sacrificial metal) से जोड़ दिया जाता है, जो एनोड (anode) के रूप में कार्य करती है।

इसके बाद, सुरक्षित की जाने वाली धातु के बजाय वह बलिदानी धातु (sacrificial metal) खुद संक्षारित (corrodes) हो जाती है। लंबी पाइपलाइनों जैसी संरचनाओं के लिए जहाँ निष्क्रिय गैल्वेनिक कैथोडिक सुरक्षा पर्याप्त नहीं होती है, वहां पर्याप्त करंट प्रदान करने के लिए एक बाहरी डीसी इलेक्ट्रिकल पावर सोर्स (external DC electrical power source) का उपयोग किया जाता है।

CP सिस्टम कई प्रकार की धातु संरचनाओं की रक्षा करता है जैसे कि स्टील के पानी और ईंधन पाइपलाइन (fuel pipe lines), स्टोरेज टैंक (storage tanks), वॉटर हीटर, स्टील वायर पाइप, ऑयल प्लेटफॉर्म, तेल के कुएं की केसिंग (oil well casing), विंड फार्म आदि। इसका एक और सामान्य अनुप्रयोग गैल्वेनाइज्ड स्टील (galvanised steel) में होता है, जिसमें स्टील के पुर्जों पर जिंक (zinc) की एक बलिदानी परत (sacrificial coating) उन्हें जंग से बचाती है। कुछ मामलों में CP प्रोटेक्शन स्ट्रेस कोरोजन क्रैकिंग (stress corrosion cracking) को भी रोक सकता है।


🔋 सेल्स के प्रकार (Types of Cells)

सेल (Cell): एक सेल एक इलेक्ट्रोकेमिकल उपकरण (electrochemical device) है जिसमें अलग-अलग सामग्रियों से बने दो इलेक्ट्रोड (electrodes) और एक इलेक्ट्रोलाइट (electrolyte) होता है। इलेक्ट्रोड और इलेक्ट्रोलाइट के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया (chemical reaction) से वोल्टेज उत्पन्न होता है।

सेल्स को इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है:

  • ड्राय सेल्स (Dry cells) 🌵
  • वेट सेल्स (Wet cells) 💧

एक ड्राय सेल (dry cell) वह होता है जिसमें पेस्ट या जेल जैसा इलेक्ट्रोलाइट होता है। नई डिजाइन और निर्माण तकनीकों के साथ, अब सेल को पूरी तरह से (hermetically) सील करना संभव है। गैस बनने के रासायनिक नियंत्रण और पूर्ण सील के साथ, ड्राय सेल्स में तरल इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग करना भी संभव है। आज ‘ड्राय सेल’ शब्द का अर्थ ऐसे सेल से है जिसे इलेक्ट्रोलाइट रिसाव (leakage) के बिना किसी भी स्थिति (position) में संचालित किया जा सकता है।

वेट सेल्स (Wet cells) वे सेल होते हैं जिन्हें सीधी (upright) स्थिति में संचालित किया जाना चाहिए। इन सेल्स में चार्जिंग या डिस्चार्जिंग के दौरान उत्पन्न होने वाली गैसों को बाहर निकलने देने के लिए वेंट्स (vents) होते हैं। सबसे आम वेट सेल लेड-एसिड सेल (lead-acid cell) है।

सेल्स को आगे प्राइमरी (primary) और सेकेंडरी (secondary) सेल्स के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

प्राइमरी सेल्स (Primary cells): प्राइमरी सेल्स वे सेल्स होते हैं जो रिचार्जेबल (rechargeable) नहीं होते हैं। यानी, डिस्चार्ज के दौरान होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया वापस (reverse) नहीं होती है। सेल के पूरी तरह से डिस्चार्ज होने पर प्रतिक्रिया में उपयोग किए गए सभी रसायन बदल जाते हैं। इसे फिर एक नए सेल से बदलना पड़ता है।


📝 प्राइमरी सेल्स के प्रकार (Types of primary cells):

  1. वोल्टेइक सेल (Voltaic cell)
  2. कार्बन-जिंक सेल (Carbon-zinc cell – Leclanche cell and Dry cell)
  3. अल्कलाइन सेल (Alkaline cell)
  4. मरकरी सेल (Mercury cell)
  5. सिल्वर ऑक्साइड सेल (Silver oxide cell)
  6. लिथियम सेल (Lithium cell)

⚡ ड्राय सेल: कार्बन-जिंक सेल (Dry Cell – Carbon-Zinc Cell)

लीक्लांशे (Leclanche) प्रकार के सेल से तरल इलेक्ट्रोलाइट (liquid electrolyte) के गिरने के खतरे के कारण सेल्स की एक और श्रेणी का आविष्कार हुआ जिसे ड्राय सेल्स (dry cells) कहा जाता है।

ड्राय सेल का सबसे आम और कम खर्चीला प्रकार कार्बन-जिंक (carbon-zinc) प्रकार है (चित्र 1 देखें)।

  • इसमें एक जिंक कंटेनर (zinc container) होता है जो नेगेटिव इलेक्ट्रोड (negative electrode) के रूप में कार्य करता है।
  • केंद्र में एक कार्बन रॉड (carbon rod) होती है जो पॉजिटिव इलेक्ट्रोड (positive electrode) होती है।
  • इसमें इलेक्ट्रोलाइट एक नम पेस्ट (moist paste) के रूप में होता है, जो अमोनियम क्लोराइड (ammonium chloride) के घोल से बना होता है।

सभी प्राइमरी सेल्स की तरह, रासायनिक प्रतिक्रिया के हिस्से के रूप में इलेक्ट्रोड में से एक विघटित (decomposed) हो जाता है। इस सेल में नेगेटिव जिंक कंटेनर इलेक्ट्रोड वह है जो खत्म (used up) हो जाता है। परिणामस्वरूप, लंबे समय तक उपकरणों में छोड़े गए सेल्स फट सकते हैं, जिससे इलेक्ट्रोलाइट बाहर निकल जाता है और आसपास के हिस्सों को नुकसान पहुँचाता है।

कार्बन-जिंक सेल्स सामान्य मानक आकारों (sizes) में तैयार किए जाते हैं। इनमें 1.5 V के AA, C और D सेल्स शामिल हैं। (AA पेन टाइप सेल, ‘C’ मीडियम साइज और ‘D’ लार्ज/इकोनॉमी साइज)।

उपयोग (Uses): प्राइमरी सेल्स का उपयोग घड़ियों (watches), स्मोक अलार्म, कार्डियक पेसमेकर, टॉर्च, हियरिंग एड्स, ट्रांजिस्टर रेडियो आदि जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में किया जाता है। 📻⌚🔦


📉 आंतरिक प्रतिरोध (Internal Resistance)

सेल से निकलने वाला आउटपुट वोल्टेज (output voltage) सेल पर लोड बदलने के साथ बदलता रहता है। सेल पर लोड (load) का अर्थ है सेल से ली गई करंट (current) की मात्रा। जैसे-जैसे लोड बढ़ता है, वोल्टेज आउटपुट कम हो जाता है।

आउटपुट वोल्टेज में यह परिवर्तन सेल के आंतरिक प्रतिरोध (internal resistance) के कारण होता है। चूँकि जिन सामग्रियों से सेल बनाया जाता है वे पूर्ण कंडक्टर (perfect conductors) नहीं होती हैं, इसलिए उनमें प्रतिरोध होता है। बाहरी सर्किट से बहने वाला करंट सेल के आंतरिक प्रतिरोध से भी बहता है।


⚠️ साधारण सेल के दोष (Defects of a simple cell):

एक साधारण वोल्टेइक सेल के साथ, करंट की शक्ति कुछ समय बाद धीरे-धीरे कम हो जाती है। यह दोष मुख्य रूप से दो कारणों से होता है:

  1. लोकल एक्शन (Local action)
  2. पोलराइजेशन (Polarisation)

लोकल एक्शन (Local action): एक साधारण वोल्टेइक सेल में, ओपन सर्किट पर भी जिंक प्लेट से हाइड्रोजन के बुलबुले निकलते देखे जाते हैं। इस प्रभाव को लोकल एक्शन कहा जाता है। यह कमर्शियल जिंक में कार्बन, आयरन, लेड आदि जैसी अशुद्धियों (impurities) की उपस्थिति के कारण होता है। ये जिंक प्लेट पर छोटे स्थानीय सेल (small local cells) बना लेते हैं और सेल की करंट शक्ति को कम कर देते हैं।

Local action को रोकने के लिए Zinc plate को Mercury के साथ Amalgamating (मिश्रण) किया जाता है। ऐसा करने के लिए, Zinc plate को थोड़े समय के लिए Dilute Sulphuric Acid में डुबोया जाता है और उसके बाद उसकी सतह पर Mercury रगड़ी जाती है।

⚡ Polarisation (ध्रुवीकरण)

जैसे ही Current बहता है, Copper plate पर Hydrogen ($H_2$) के बुलबुले (bubbles) जमा होने लगते हैं, जो धीरे-धीरे एक पतली परत बना लेते हैं। इसके कारण Current की शक्ति कम हो जाती है और अंततः बंद हो जाती है। इस प्रभाव को Cell का Polarisation कहा जाता है।

  • बचाव: Polarisation को रोकने के लिए कुछ रसायनों (chemicals) का उपयोग किया जाता है जो हाइड्रोजन को इकट्ठा होने से पहले ही पानी में ऑक्सीकरण (oxidize) कर देते हैं। इन रसायनों को De-polarisers कहा जाता है।

🔄 Secondary Cell (सेकेंडरी सेल)

एक Cell जिसे discharge होने के बाद, विपरीत दिशा में Electric Current भेजकर फिर से चार्ज (recharge) किया जा सकता है, उसे Secondary Cell के रूप में जाना जाता है।

  • इसे Storage Cell भी कहा जाता है क्योंकि चार्ज होने के बाद यह ऊर्जा को तब तक स्टोर करके रखता है जब तक कि इसका उपयोग न किया जाए।

Secondary Cells के प्रकार:

  1. Lead acid cell (लेड एसिड सेल)
  2. Alkaline cell या Nickel-iron cell (एल्कालाइन या निकल-आयरन सेल)

⚙️ Lead Acid Cell के भाग (Parts of Lead Acid Cell – Fig 2)

एक Lead Acid Cell के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:

  1. Container (कंटेनर): यह Hard rubber, Glass या Celluloid का बना होता है ताकि इसमें Plates, Separators और Electrolyte को रखा जा सके। कंटेनर के नीचे Ribs (पसलियां) बनी होती हैं जिन पर प्लेट्स टिकी होती हैं। इन Ribs के बीच की जगह को Sediment Chamber कहा जाता है।
  2. Plates (प्लेट्स): Positive plates मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:
    • Plante Plates: इन्हें बार-बार चार्ज और डिस्चार्ज करके तैयार किया जाता है। शुरुआत में ये शुद्ध लेड (Pure Lead) की होती हैं जो चार्ज होने के बाद Lead Peroxide में बदल जाती हैं।
    • Faure Plate: इन्हें ‘Pasted Plates’ भी कहते हैं। ये एक आयताकार लेड ग्रिड (Rectangular Lead Grid) से बनी होती हैं जिसमें Lead Peroxide ($PbO_2$) का पेस्ट भरा जाता है।
  3. Negative Plates: ये भी आयताकार लेड ग्रिड की बनी होती हैं, लेकिन इनमें सक्रिय पदार्थ के रूप में Spongy Lead (Pb) पेस्ट के रूप में भरा होता है।
  4. Separators (सेपरेटर): ये लकड़ी या रबर की पतली छिद्रित (Porous) शीट्स होती हैं। इनका उपयोग Positive और Negative प्लेटों के बीच Short Circuit को रोकने के लिए किया जाता है।
  5. Post Terminal (पोस्ट टर्मिनल): प्लेट कनेक्टर से जुड़ी वेल्डेड प्लेटों के प्रत्येक समूह से ऊपर की ओर निकला हुआ एक छोटा पोल ‘Post Terminal’ बनाता है।
  6. Electrolyte (इलेक्ट्रोलाइट): लेड एसिड सेल में Dilute Sulphuric Acid ($H_2SO_4$) का उपयोग किया जाता है। इलेक्ट्रोलाइट की Specific Gravity (विशिष्ट घनत्व) 1.24 से 1.28 के बीच होती है।

⚙️ Working Principle (कार्य सिद्धांत)

Secondary cell में शुरुआत में कोई महत्वपूर्ण विद्युत-रासायनिक ऊर्जा (Electrochemical energy) नहीं होती है। सबसे पहले ऊर्जा को सेल में चार्ज (Charge) करना पड़ता है। इसके बाद सेल उस संग्रहित ऊर्जा को तब तक बनाए रखता है जब तक उसका उपयोग न किया जाए।

⚗️ चार्जिंग के दौरान रासायनिक बदलाव (Chemical Changes during Charging)

जब सेल चार्ज होता है, तो इसमें निम्नलिखित रासायनिक क्रियाएँ होती हैं:

  • Lead Sulphate (PbSO₄): चार्जिंग के दौरान यह बदलकर Sponge Lead (Pb) बन जाता है (Negative Plate पर)।
  • Positive Plate: यहाँ लेड सल्फेट बदलकर Lead Peroxide (PbO₂) बन जाता है।
  • Electrolyte: चार्जिंग के दौरान इलेक्ट्रोलाइट (H₂SO₄) और भी मज़बूत (Strong) हो जाता है। 🧪

⚡ सेल वोल्टेज (Cell Voltage)

एक पूरी तरह से चार्ज (Fully Charged) सेल का वोल्टेज 2.1V से 2.6V के बीच होता है। जब सेल डिस्चार्ज (Discharge) हो जाता है, तो इसका वोल्टेज गिरकर 1.8V तक आ जाता है।

📊 बैटरी की क्षमता (Capacity)

किसी स्टोरेज सेल की क्षमता को Ampere-Hour (AH) में मापा जाता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि बैटरी कितने समय (Hours) तक कितना करंट (Amperes) दे सकती है।

  • फार्मूला: Capacity = Current × Time (AH)

🌡️ तापमान और विशिष्ट घनत्व (Temperature and Specific Gravity)

बैटरी के सही संचालन के लिए Electrolyte का तापमान 27°C के आसपास होना चाहिए। इसकी Specific Gravity (विशिष्ट घनत्व) 1.250 ± 0.010 होनी चाहिए। ⚠️ ध्यान दें: अगर तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो पॉजिटिव प्लेट में Sulphation और Buckling की समस्या हो सकती है।


🛠️ बैटरी के मुख्य दोष (Defects in Battery)

बैटरी में मुख्य रूप से तीन प्रकार के दोष (Defects) पाए जाते हैं:

  1. Hard Sulphation (हार्ड सल्फेशन):

    • जब सेल को बहुत लंबे समय तक डिस्चार्ज छोड़ दिया जाता है, तो प्लेट्स पर सख्त परत जम जाती है। इससे Internal Resistance बढ़ जाता है।
    • समाधान: इसे बहुत कम करंट पर लंबे समय तक चार्ज करके ठीक किया जा सकता है, जिसे Trickle Charge कहते हैं। 🕒
  2. Buckling (बकलिंग):

    • ज़्यादा चार्जिंग (Overcharging) या तेज़ी से डिस्चार्जिंग के कारण इलेक्ट्रोड्स (Electrodes) का मुड़ जाना ‘बकलिंग’ कहलाता है। 📉
  3. Partial Short (आंशिक शॉर्ट):

    • प्लेट्स से गिरने वाले सेडिमेंट्स (Sediments) की वजह से पॉजिटिव और नेगेटिव प्लेट्स आपस में जुड़ जाती हैं, जिससे सेल ओवरहीट होने लगता है। ऐसी स्थिति में सेल को बदलना ही बेहतर है। 🔄

📉 बैटरी की दक्षता (Efficiency)

बैटरी की कुशलता को दो तरह से देखा जाता है:

Ampere-Hour (AH) Efficiency: $$\text{AH Efficiency} = \frac{\text{Output in AH discharge}}{\text{Input in AH charge}}$$

Watt-Hour (WH) Efficiency: यह हमेशा AH efficiency से कम होती है क्योंकि डिस्चार्ज के समय वोल्टेज, चार्जिंग के समय से कम रहता है। $$\text{WH Efficiency} = \text{AH Efficiency} \times \frac{\text{Average volts on discharge}}{\text{Average volts on charge}}$$

⚡ चार्ज और डिस्चार्ज चक्र के दौरान रासायनिक क्रिया (Chemical Action during Charge and Discharge Cycle)

आपकी जानकारी के लिए सेल में चार्जिंग और डिस्चार्जिंग के दौरान होने वाली रासायनिक क्रिया नीचे दी गई है:

📉 डिस्चार्ज के दौरान (During Discharge):

पॉजिटिव प्लेट (Positive Plate):

  • Lead peroxide + Hydrogen + Sulphuric Acid → Lead sulphate + water
  • PbO₂ + H₂ + H₂SO₄ → PbSO₄ + 2H₂O

नेगेटिव प्लेट (Negative Plate):

  • Pure lead + Sulphate = Lead sulphate
  • Pb + SO₄ = PbSO₄

📈 चार्ज के दौरान (During Charge):

पॉजिटिव प्लेट (Positive Plate):

  • Lead sulphate + Sulphate + Water → Lead peroxide + Sulphuric acid
  • PbSO₄ + SO₄ + 2H₂O → PbO₂ + 2H₂SO₄

नेगेटिव प्लेट (Negative Plate):

  • Lead sulphate + Hydrogen → Lead + Sulphuric acid
  • PbSO₄ + H₂ → Pb + H₂SO₄

🔩 निकल आयरन सेल (The Nickel Iron Cell – Fig 8)

निकल आयरन सेल को ‘Edison Cell’ भी कहा जाता है। आइए इसके मुख्य भागों (Parts) को समझते हैं:

मुख्य भाग (Parts):

  • पॉजिटिव प्लेट (Positive plate) ➕
  • नेगेटिव प्लेट (Negative plate) ➖
  • इलेक्ट्रोलाइट (Electrolyte) 🧪
  • कंटेनर (Container) 📦
  • सेपरेटर्स (Separators) 📏

बनावट (Construction Details):

  1. Positive Plate: यह Nickel hydroxide [Ni(OH)₄] ट्यूबों और छेद वाले स्टील रिबन (perforated steel ribbon) से बनी होती है, जिसे सर्पिलाकार (spirally) लपेटा जाता है। इस पूरे सेट को निकल-प्लेटेड किया जाता है।
  2. Negative Plate: यह बारीक छेदों वाली nickel steel strip से बनी होती है।
  3. Electrolyte: इसमें 21% पोटेशियम हाइड्रोक्साइड (KOH) का घोल होता है, जिसमें कुछ मात्रा में लिथियम हाइड्रेट (LiOH) मिलाया जाता है।
  4. Container: कंटेनर निकल-प्लेटेड स्टील का बना होता है।
  5. Separators: सेपरेटर्स हार्ड रबर की पट्टियों (hard rubber strips) से बने होते हैं।

⚗️ रासायनिक परिवर्तन (Chemical Changes)

  • Discharge पर: पोटेशियम हाइड्रोक्साइड (KOH), K और (OH) आयनों में टूट जाता है। OH आयन नेगेटिव प्लेट की ओर जाते हैं और आयरन (iron) को ऑक्सीकरण (oxidise) करते हैं। K आयन एनोड (anode) पर जाते हैं और Ni(OH)₄ को Ni(OH)₂ में बदल देते हैं।
  • Charge पर: चार्जिंग के दौरान इसके ठीक विपरीत (opposite) प्रतिक्रिया होती है।
  • Electrolyte की भूमिका: इलेक्ट्रोलाइट केवल OH आयनों के ट्रांसफर के लिए एक स्रोत (source) के रूप में कार्य करता है। यह किसी रासायनिक परिवर्तन में हिस्सा नहीं लेता, इसलिए इसकी डेंसिटी (density) में कोई खास बदलाव नहीं आता है।

🌟 विशेषताएं (Characteristics)

  • EMF: पूरी तरह चार्ज होने पर सेल का EMF 1.4V होता है, और डिस्चार्ज होने पर यह 1.2V तक पहुँच जाता है। यदि वोल्टेज 1.15V से नीचे गिरता है, तो सेल पूरी तरह डिस्चार्ज माना जाता है।
  • मजबूती (Strength): स्टील से बने होने के कारण प्लेटों की मैकेनिकल स्ट्रेंथ बहुत अच्छी होती है।
  • Current Handling: यह सेल भारी चार्ज और डिस्चार्ज करंट को सहन कर सकता है और डिस्चार्ज रहने पर भी खराब नहीं होता है।
  • Lead-Acid से तुलना: यह मैकेनिकल स्ट्रेंथ और टिकाऊपन (durability) में लेड एसिड सेल से बेहतर है।

💡 विशेष नोट: लेड-एसिड सेल की तुलना में, एल्कलाइन सेल (Alkaline cells) कम तापमान पर बेहतर काम करते हैं, इनमें से हानिकारक धुआं (obnoxious fumes) नहीं निकलता, इनका सेल्फ-डिस्चार्ज बहुत कम होता है और इनकी प्लेटें मुड़ती (buckle) या महकती नहीं हैं।

Chemical Action (रासायनिक क्रिया) 🧪

नीचे दी गई रासायनिक समीकरण (Chemical equation) Nickel-iron cell की चार्जिंग और डिस्चार्जिंग प्रक्रिया को दर्शाती है:

Ni(OH)₄ + KOH + Fe ⇌ Ni(OH)₂ + KOH + Fe(OH)₂

  • Hydrated Ferrous (हाइड्रेटेड फेरस) और Potassium (पोटेशियम) मिलकर प्रतिक्रिया करते हैं।
  • डिस्चार्ज के दौरान यह Nickel (निकल) और अन्य तत्वों में परिवर्तित हो जाता है।

Comparison: Lead-acid cell and Edison cell (तुलना: लेड-एसिड सेल और एडिसन सेल) 📊

| Sl.No. | Particulars (विवरण) | Lead-acid cell (लेड-एसिड सेल) | Nickel iron cell (निकल आयरन सेल) | | :— | :— | :— | :— | | 1 | Positive plate (धनात्मक प्लेट) | PbO₂, Lead peroxide (लेड पेरॉक्साइड) | Nickel hydroxide Ni(OH)₄ या Nickel oxide (NiO₂) | | 2 | Negative plate (ऋणात्मक प्लेट) | Sponge lead (स्पंज लेड) | Iron (लोहा/आयरन) | | 3 | Electrolyte (इलेक्ट्रोलाइट) | Diluted H₂SO₄ (तनु सल्फ्यूरिक एसिड) | KOH (पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड) | | 4 | Average emf (औसत EMF) | 2.1 V/cell | 1.2 V/cell | | 5 | Internal resistance (आंतरिक प्रतिरोध) | Comparatively low (तुलनात्मक रूप से कम) | Comparatively higher resistance (तुलनात्मक रूप से अधिक प्रतिरोध) | | 6 | Efficiency (दक्षता): <br> Amp-hour <br> Watt-hour | <br> 90 – 95% <br> 72 – 80% | <br> Nearly 80% (लगभग 80%) <br> About 60% (लगभग 60%) | | 7 | Cost (लागत) | Comparatively less than alkaline cell (क्षारीय सेल की तुलना में कम) | Almost twice that of Pb-acid cell (लेड-एसिड सेल से लगभग दोगुनी) | | 8 | Life (जीवनकाल) | Gives nearly 1250 charges and discharges (लगभग 1250 चार्ज-डिस्चार्ज चक्र) | Five years atleast (कम से कम पाँच वर्ष) | | 9 | Strength (मजबूती) | Needs much care and maintenance. Sulphation occurs often. (अधिक देखभाल की आवश्यकता, अक्सर सल्फेशन होता है) | Robust, mechanically strong, can withstand vibration. Can be left discharged. (मजबूत, कंपन सहन करने योग्य, डिस्चार्ज छोड़ सकते हैं) |


Advantages and Disadvantages of Nickel Iron Cell (निकल आयरन सेल के लाभ और हानियाँ) ⚖️

A. Advantages (लाभ) ✅

  1. यह भारी चार्ज और डिस्चार्ज करंट (heavy charge and discharge current) को सहन कर सकता है और खराब नहीं होता है।
  2. इसकी बनावट बहुत मजबूत (robust in construction) है, इसलिए इसे रफ तरीके से भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  3. यह वजन में हल्का (light in weight) है, जिससे यह पोर्टेबल (ले जाने में आसान) बन जाता है।
  4. इसे लंबे समय तक डिस्चार्ज अवस्था (left discharged) में छोड़ा जा सकता है।
  5. यह उच्च तापमान (higher temperatures) पर भी काम कर सकता है।
  6. इसका उपयोग उच्च तापमान वाली जगहों पर भी किया जाता है।
  7. इसका उपयोग बिजली से चलने वाले वाहनों (electric operated vehicles), स्विच-गियर ऑपरेशंस आदि में किया जाता है।

B. Disadvantages (हानियाँ) ❌

  1. इसका EMF स्थिर (EMF constant) नहीं रहता है।
  2. इसकी दक्षता (Efficiency) लेड-एसिड सेल की तुलना में कम होती है।
  3. इसका आंतरिक प्रतिरोध (internal resistance) बहुत अधिक होता है।
  4. लेड-एसिड सेल की तुलना में इसका EMF कम होता है।
  5. यदि तापमान बढ़ाया जाता है, तो इसका EMF थोड़ा कम (slightly reduce) हो जाएगा।

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Note: यह पाठ ITI Electrician के छात्रों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है ताकि वे तकनीकी शब्दों को हिंदी और अंग्रेजी के मिश्रण के साथ आसानी से समझ सकें। 💡


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Instructor Note: छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे सेल की Specific Gravity चेक करने के लिए Hydrometer का उपयोग करना सीखें और चार्जिंग के दौरान वेंट प्लग (Vent Plugs) को खुला रखें। 😊


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Instructor Note: विद्यार्थियों को चित्र (Fig 2, 3, 4) ध्यान से देखने के लिए कहें ताकि वे Container, Plates और Separators की स्थिति को समझ सकें। इलेक्ट्रोलाइट की Specific Gravity का मान परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।


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Power : Electrician (NSQF Revised – 2022) – Related Theory for Exercise 1.6.57 Page: 122


Power : Electrician (NSQF Revised – 2022) – Related Theory Page 121


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Instructor Note: छात्रों, इन सूत्रों ($m = ZIt$) को याद रखें क्योंकि ये आपकी परीक्षा में न्यूमेरिकल हल करने के काम आएंगे! ✍️📚