Wiring Accessories और IE Rules: पूरी जानकारी 🔌⚡
नमस्ते छात्रों! आज के इस lesson में हम Wiring Accessories और उनसे जुड़े IE Rules (Indian Electricity Rules) के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। यह जानकारी domestic wiring के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
इस पाठ के मुख्य उद्देश्य (Objectives): 🎯
इस lesson के अंत में आप निम्न बातें सीख पाएंगे:
- Domestic wiring में इस्तेमाल होने वाली accessories को classify, specify, identify करना और उनके उपयोग (uses) बताना।
- Safety और electric supply से जुड़े IE rules की जानकारी प्राप्त करना।
Electrical Accessories क्या हैं? (What are Electrical Accessories?) 💡
एक Electrical domestic accessory वह बुनियादी हिस्सा (basic part) है जिसका उपयोग wiring में सुरक्षा (protection), एडजस्टमेंट (adjustment) या electrical circuits को कंट्रोल (control) करने के लिए, या इन सभी कार्यों के तालमेल के लिए किया जाता है।
Accessories की रेटिंग (Rating of Accessories) 📊
- Accessories की Standard current ratings आमतौर पर 6, 16 और 32 amps होती हैं।
- B.I.S. 1293-1988 के अनुसार, इनकी voltage rating 240V AC होती है।
Accessories की माउंटिंग (Mounting of Accessories) 🛠️
Accessories को इस तरह design किया जाता है कि उन्हें या तो surface पर या concealed (flush type) तरीके से लगाया जा सके।
- Surface mounting type: इन accessories में एक seating (आधार) दिया जाता है, जिससे जब इन्हें mount किया जाता है, तो ये उस सतह (surface) के ऊपर पूरी तरह से उभरी हुई नजर आती हैं।
- Flush-mounting type: इन accessories को दीवार या switch box की सतह के अंदर (flush) फिट करने के लिए design किया गया है। इनका पिछला हिस्सा switch plate के साथ जुड़ा होता है और यह दीवार के बराबर दिखता है।
Wiring Installation में उपयोग होने वाली Accessories का वर्गीकरण (Classification): 🗂️
Wiring में इस्तेमाल होने वाली accessories को उनके उपयोग के आधार पर बांटा गया है:
- Controlling accessories (जैसे: Switches)
- Holding accessories (जैसे: Lamp holders)
- Safety accessories (जैसे: Fuses)
- Outlet accessories (जैसे: Sockets)
- General accessories (जैसे: Ceiling roses)
कार्य और उपयोग के स्थान के अनुसार Switches के प्रकार (Types of Switches): 🔘
- Single pole, one-way switch
- Single pole, two-way switch
- Intermediate switch
- Bell-push या push-button switch
- Pull या ceiling switch
- Double pole switch (DP switches)
- Iron clad double pole, (ICDP) switch.
- Iron clad triple-pole (ICTP) switch.
नोट: ऊपर दिए गए 1, 2, 3, 4 और 6 नंबर के switches या तो surface mounting हो सकते हैं या flush-mounting type।
प्रमुख Switches का विवरण: 📝
1. Single pole, one-way switch: यह एक two-terminal device है, जो केवल एक single circuit को चालू (make) या बंद (break) करने में सक्षम है। इसका उपयोग light, fan या 6 amps के socket को control करने के लिए किया जाता है। (Fig 1)
2. Two-way switch: यह एक three-terminal device है, जो एक ही स्थिति (single position) से दो connections बनाने या तोड़ने में सक्षम है (Fig 2)। इन switches का उपयोग staircase lighting (सीढ़ियों की वायरिंग) में किया जाता है, जहाँ एक lamp को दो अलग-अलग जगहों से control किया जाता है।
1. इंटरमीडिएट स्विच (Intermediate Switch) 🔄
यह एक चार-टर्मिनल डिवाइस (four-terminal device) है जो दो अलग-अलग पोजीशन से दो कनेक्शन बनाने या तोड़ने (making or breaking) में सक्षम है (Fig 3 देखें)।
- उपयोग: इस स्विच का इस्तेमाल 2-वे स्विच (2 way switches) के साथ किया जाता है, ताकि एक लैंप को तीन या अधिक स्थानों से नियंत्रित (control) किया जा सके।
2. बेल-पुश या पुश-बटन स्विच (Bell-push or Push-button switch) 🔔
यह एक दो-टर्मिनल डिवाइस है जिसमें एक spring-loaded button होता है।
- काम करने का तरीका: जब इसे दबाया जाता है, तो यह सर्किट को अस्थायी रूप से ‘बनाता’ (makes) है और छोड़ने पर वापस ‘ब्रेक’ (break) पोजीशन में आ जाता है।
3. आयरन-क्लैड डबल पोल (ICDP) मेन स्विच (Iron – Clad Double pole Main Switch) 🏠
इसे DPIC switch के रूप में भी जाना जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से सिंगल-फेज घरेलू इंस्टॉलेशन (single phase domestic installations) में मुख्य सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
- कंट्रोल: यह सप्लाई के फेज (phase) और न्यूट्रल (neutral) दोनों को एक साथ कंट्रोल करता है (Fig 4)।
- करंट रेटिंग: इस स्विच की करंट रेटिंग 16 amps से 32 amperes तक बदलती रहती है।
4. आयरन-क्लैड ट्रिपल पोल (ICTP) मेन स्विच (Iron – Clad Triple pole Main Switch) 🏭
इसे TPIC switch भी कहा जाता है और इसका उपयोग बड़े घरेलू इंस्टॉलेशन और 3-फेज पावर सर्किट में किया जाता है।
- संरचना: इसमें 3 फ्यूज कैरियर (fuse carriers) होते हैं, जो प्रत्येक फेज के लिए एक होते हैं।
- न्यूट्रल कनेक्शन: कुछ स्विच में केसिंग के अंदर एक न्यूट्रल लिंक (neutral link) भी प्रदान किया जाता है (Fig 5)।
- करंट रेटिंग: इस स्विच की करंट रेटिंग 16 से 400 amps तक होती है।
💡 होल्डिंग एक्सेसरीज (Holding Accessories) – लैंप-होल्डर्स
लैंप-होल्डर (Lamp-holder) का उपयोग लैंप को पकड़ने (hold) के लिए किया जाता है। पहले पीतल (brass holders) का अधिक उपयोग होता था, लेकिन आजकल उनकी जगह बैकेलाइट (bakelite holders) ने ले ली है।
मुख्य रूप से चार प्रकार के लैंप-होल्डर उपलब्ध हैं:
- बेयोनेट कैप लैंप-होल्डर (Bayonet cap lamp-holders)
- स्क्रू टाइप होल्डर (Screw type holders)
- एडिसन स्क्रू टाइप लैंप-होल्डर (Edison screw type lamp-holders)
- गोलियत एडिसन स्क्रू टाइप लैंप-होल्डर (Goliath Edison screw type lamp-holders)
📍 बेयोनेट कैप (BC) लैंप-होल्डर (Bayonet cap lamp-holders)
इस प्रकार में, बल्ब को स्लॉट (slot) में फिट किया जाता है और लैंप कैप में लगे दो पिनों के माध्यम से उसे स्थिति में रखा जाता है। इसमें ठोस या खोखले स्प्रिंग कांटेक्ट टर्मिनल (spring contact terminals) होते हैं।
📍 पेंडेंट लैंप-होल्डर (Pendent lamp-holders) 🏮
इस होल्डर (Fig 6) का उपयोग उन जगहों पर किया जाता है जहाँ लैंप को लटकने की स्थिति (hanging position) में रखने की आवश्यकता होती है। ये या तो पीतल या बैकेलाइट के बने होते हैं। इन्हें छत से लैंप लटकाने के लिए ceiling roses के साथ उपयोग किया जाता है।
📍 बैटन लैंप-होल्डर (Batten lamp-holders) 🧱
स्ट्रेट बैटन होल्डर (Fig 7a) का उपयोग सपाट सतह (flat surface) जैसे कि राउंड ब्लॉक या लकड़ी के बोर्ड आदि पर किया जाता है। ये पीतल या बैकेलाइट के बने होते हैं।
📍 एंगल होल्डर्स (Angle holders) 📐
एंगल बॉटम होल्डर (Fig 7b) लैंप को एक विशेष कोण (particular angle) पर रखने के लिए होता है। इनका उपयोग विज्ञापन बोर्ड, विंडो डिस्प्ले, किचन आदि में किया जाता है।
1. 💡 Edison screw-type lamp-holders (एडिसन स्क्रू-टाइप लैंप-होल्डर)
इस प्रकार के holder में अंदर की तरफ चूड़ियाँ (inner screw threads) बनी होती हैं और लैंप को इसमें घुमाकर (screwing) फिट किया जाता है।
- Connection: इसमें एक centre contact होता है जो live wire से जुड़ा होता है और screwed cap को neutral wire से जोड़ा जाता है।
- Usage: 200W से अधिक और 300W तक के लैंप के लिए इनका उपयोग किया जाता है। (चित्र 8 देखें)
2. 🏗️ Goliath Edison screw (GES) type holders (गोलियत एडिसन स्क्रू होल्डर)
इन होल्डर्स का कवर porcelain (चीनी मिट्टी) का बना होता है। (चित्र 9 देखें)
- Application: इनका उपयोग मुख्य रूप से studios, headlights, floodlights, focussing lights आदि में किया जाता है।
- Wattage: ये होल्डर्स 300W से अधिक क्षमता वाले लैंप के लिए इस्तेमाल होते हैं।
📋 Specification of a lamp-holder (लैंप-होल्डर का विवरण)
एक लैंप-होल्डर को चुनते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- निर्माण के लिए उपयोग की गई Material का प्रकार।
- Gripping का प्रकार (पकड़ कैसी है)।
- Mounting का प्रकार (उसे कैसे लगाया जाएगा)।
- उसका Working current और Voltages।
🔌 Socket outlet current rating (सॉकेट आउटलेट करंट रेटिंग)
स्टैंडर्ड सॉकेट की रेटिंग 6, 16 और 32 amperes और 240 volts की होनी चाहिए।
3. 🔌 Two-pin socket (टू-पिन सॉकेट)
यह सॉकेट 6A, 250V के लिए होता है। इसमें केवल दो पिन होती हैं और earth connection नहीं होता।
- Safety: ये केवल double insulated appliances (जैसे PVC बॉडी वाले उपकरण) के लिए ही उपयुक्त होते हैं।
4. 🔌 Two-pin plug top (टू-पिन प्लग टॉप)
इसका उपयोग सॉकेट से सप्लाई लेने के लिए किया जाता है। इसमें एक ही साइज की दो पिंस होती हैं।
5. 🏠 Three-pin socket (थ्री-पिन सॉकेट)
यह सॉकेट light और power circuits दोनों के लिए उपयुक्त है। (चित्र 10 देखें)
- Rating: ये 6A, 250V या 16A, 250V में उपलब्ध होते हैं।
- Types: ये surface-mounting और flush type में आते हैं।
- Terminals: इसमें तीन टर्मिनल्स होते हैं: Line (L), Neutral (N) और Earth (E)।
6. 🔌 Three-pin plug top (थ्री-पिन प्लग टॉप)
सॉकेट से करंट लेने के लिए इसका उपयोग होता है। (चित्र 11 देखें)
- Design: इसमें तीन पिंस होती हैं। दो पिंस एक ही साइज की होती हैं, जबकि तीसरी पिन बड़ी और लंबी होती है, जो Earth के लिए होती है।
- Material: ये bakelite या PVC materials के बने होते हैं।
🛠️ General accessories (सामान्य एक्सेसरीज)
कुछ अन्य एक्सेसरीज जिनका उपयोग विशेष कार्यों के लिए किया जाता है:
- Appliance connectors (या iron connectors)
- Adapters (एडेप्टर)
- Ceiling roses: (a) two-plate, (b) three-plate
- Connectors
- Distribution board (डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड)
- Neutral links
☕ Appliance connectors or iron connectors (एप्लायंस कनेक्टर्स)
इनका उपयोग female connectors के रूप में किया जाता है ताकि electric kettles, electric iron, hotplate, heaters आदि को सप्लाई दी जा सके। (चित्र 12 देखें)
- Material: ये bakelite या porcelain के बने होते हैं।
- Rating: इनकी रेटिंग आमतौर पर 16A, 250V होती है।
🔌 1. Adaptor (एडॉप्टर) – Fig 13
Adaptor का उपयोग छोटे उपकरणों (small appliances) के लिए लैम्प होल्डर (lamp holder) से बिजली की सप्लाई लेने के लिए किया जाता है।
- ये Bakelite (बेकेलाइट) के बने होते हैं।
- इनकी रेटिंग आमतौर पर 6 A, 250 V तक होती है।
🏵️ 2. Ceiling Roses (सीलिंग रोज़)
Ceiling roses का उपयोग वायरिंग से टैपिंग पॉइंट (tapping points) प्रदान करने के लिए किया जाता है, ताकि पंखों (fans), पेंडेंट होल्डर्स (pendent holders), और ट्यूब लाइट्स आदि को पावर सप्लाई दी जा सके।
- आमतौर पर इनसे कनेक्शन के लिए Flexible wires (लचीले तारों) का उपयोग किया जाता है।
(A) Two-plate ceiling rose (टू-प्लेट सीलिंग रोज़) – Fig 14a & b
यह बेकेलाइट से बना होता है और इसमें 2 टर्मिनल्स (Phase & Neutral) होते हैं।
- ये दोनों टर्मिनल्स एक Bakelite Bridge द्वारा एक-दूसरे से अलग (separate) होते हैं।
- इसकी करंट क्षमता 6A, 250V होती है।
(B) Three-plate ceiling rose (थ्री-प्लेट सीलिंग रोज़) – Fig 14c
इस प्रकार के सीलिंग रोज़ में 3 टर्मिनल्स होते हैं जो एक बेकेलाइट ब्रिज द्वारा अलग किए जाते हैं। इसका उपयोग दो मुख्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है:
- Bunch light control (लाइटों के गुच्छे को नियंत्रित करने के लिए)।
- Phase wire के लिए टैपिंग प्रदान करने के लिए (जैसा Fig 15 में दिखाया गया है)।
- यह भी 6A, 250V की रेटिंग में उपलब्ध होते हैं।
📦 3. Distribution Board (डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड) – Fig 16
जब घर या इंडस्ट्री में कुल लोड (Total Load) अधिक होता है, तो उसे कई Circuits में बांटना पड़ता है। वहां Distribution board का उपयोग होता है।
- इसका उपयोग तब किया जाता है जब लोड 800W से अधिक हो।
- इसमें फ्यूज (fuses) की संख्या सर्किट की संख्या पर निर्भर करती है।
- इसमें एक Neutral link भी दिया जाता है ताकि विभिन्न सर्किटों के लिए न्यूट्रल वायर लिया जा सके।
- ये सभी ब्रांच फ्यूज एक Metal box (धातु के बक्से) में बंद होते हैं।
- ये मार्केट में Two-way, three-way, 4, 6, 12-way टाइप में मिलते हैं।
🔗 4. Neutral Link (न्यूट्रल लिंक) – Fig 17
थ्री-फेज सिस्टम (Three-phase system) में फेज को स्विच के माध्यम से कंट्रोल किया जाता है, जबकि न्यूट्रल को एक लिंक के जरिए जोड़ा जाता है जिसे Neutral Link कहते हैं।
- इसकी रेटिंग्स: 16A, 32A, 63A, 100A न्यूट्रल लिंक होती हैं।
⚠️ महत्वपूर्ण जानकारी: Accessories Rating
वर्ष 1991 से, BIS 1293-1988 के अनुसार, एक्सेसरीज की रेटिंग 250V और 5 या 15 एम्प्स के बजाय 240V और 6 या 16 एम्प्स कर दी गई है। ✅
🔘 5. Toggle Switches (टॉगल स्विच) – Fig 18
यह एक इलेक्ट्रिक स्विच है जिसे एक बाहर निकले हुए Lever (लीवर) के माध्यम से चलाया जाता है।
- इस लीवर को ऊपर या नीचे (Upward and Downward) करके लाइट चालू या बंद की जाती है।
- इन्हें Snap switches भी कहा जाता है।
✨ 6. Modular Switches (मॉड्यूलर स्विच) – Fig 19
यह मॉडर्न ज़माने के स्विच हैं। आजकल मार्केट में विभिन्न साइज और रंगों के Modular switches उपलब्ध हैं।
- इनमें सॉकेट्स और इंडिकेटर्स (Indicators) भी साथ में कंबाइंड (combined) मिलते हैं, जो दिखने में सुंदर और सुरक्षित होते हैं।
⚖️ 7. Indian Electricity Rules (IE Rules) – सुरक्षा आवश्यकताएं
- IE Rules 1956 को भारतीय विद्युत अधिनियम 1910 (Indian Electricity Act 1910) की धारा 37 के तहत बनाया गया था।
- अब नए कानूनों के तहत इसे फिर से परिभाषित (Redefined) किया गया है ताकि बिजली के उपयोग में सुरक्षा बनी रहे।
महत्वपूर्ण जानकारी: Central Electricity Authority (measures relating to safety and electric supply) Regulation (CEAR) 2010, जो 20 सितंबर 2010 से लागू हुआ, इसने पुराने Indian Electricity Rules 1956 की जगह ले ली है।
🛡️ सुरक्षा नियम (SAFETY RULES)
सुरक्षा नियमों में निम्नलिखित बहुत महत्वपूर्ण हैं और इन पर ध्यान देना आवश्यक है। Indian Electricity Rules 1956 का हर नियम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुरक्षा (Safety) से जुड़ा है।
🔹 Rule 32: स्विच हमेशा लाइव कंडक्टर पर (Switches on Live Conductor) स्विच को हमेशा Live Conductor (फेज तार) पर ही लगाना चाहिए। न्यूट्रल कंडक्टर में Gang Switch के अलावा कोई भी कट-आउट, लिंक या स्विच नहीं लगाया जाना चाहिए। कंडक्टरों की मार्किंग करते समय वायरिंग के कोड ऑफ प्रैक्टिस का पालन किया जाना चाहिए।
🔹 Rule 50: ऊर्जा की आपूर्ति और उपयोग (Energy Supply and Usage) बिजली की सप्लाई तब तक नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि निम्नलिखित प्रावधान न हों:
- ट्रांसफार्मर की सेकेंडरी साइड पर एक उपयुक्त Linked Switch या Circuit Breaker लगा हो।
- हर सर्किट एक उपयुक्त Cut-out द्वारा सुरक्षित होना चाहिए।
- प्रत्येक मोटर या मोटरों के समूह को एक Linked Switch या Circuit Breaker द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए।
- यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरती जाए कि कोई भी Live Part (नंगा तार) खुला न रहे।
🏗️ हाई और एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज इंस्टॉलेशन के विशेष प्रावधान
🔹 Rule 63: किसी भी हाई वोल्टेज (High Voltage) इंस्टॉलेशन को चालू (Energise) करने से पहले Inspector की मंजूरी जरूरी है। 🔹 Rule 65: सप्लाई शुरू करने से पहले इंस्टॉलेशन का निर्धारित परीक्षण (Prescribed Testing) किया जाना चाहिए। 🔹 Rule 66: कंडक्टरों को मैटेलिक कवरिंग (Metallic Covering) में बंद किया जाना चाहिए और उपकरणों को Overloading से बचाने के लिए उचित सर्किट ब्रेकर दिए जाने चाहिए। 🔹 Rule 68: आउटडोर टाइप सब-स्टेशन (Outdoor Sub-station) के मामले में, ट्रांसफार्मर के चारों ओर कम से कम 1.8 मीटर ऊँचाई की धातु की बाड़ (Metallic Fencing) लगाई जानी चाहिए।
📐 ओवरहेड (OH) लाइन के प्रावधान
🔹 Rule 77: सड़क के पार जमीन से कंडक्टर की न्यूनतम दूरी (Clearance from Ground)
- निम्न और मध्यम वोल्टेज (Low and Medium Voltage) लाइन: 5.8 मीटर
- उच्च वोल्टेज (High Voltage) लाइन: 6.1 मीटर
सड़क के किनारे (Along a Street):
- Low और Medium Voltage लाइन: 5.5 मीटर
- High Voltage लाइन: 5.8 मीटर
सड़क के अलावा अन्य स्थानों पर (Other than along/across street):
- Low, Medium और High Voltage (11 KV तक नंगे तार): 4.6 मीटर
- 11 KV तक इंसुलेटेड (Insulated) तार: 4.0 मीटर
- 11 KV से ऊपर High Voltage: 5.2 मीटर
🏠 इमारतों से दूरी (Clearance from Buildings)
🔹 Rule 79: लो और मीडियम वोल्टेज लाइनों की दूरी
- वर्टिकल क्लीयरेंस (Vertical Clearance): 2.5 मीटर
- हॉरिजॉन्टल क्लीयरेंस (Horizontal Clearance): 1.2 मीटर
🔹 Rule 80: हाई और एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज की दूरी
- 33 KV तक वर्टिकल क्लीयरेंस: 3.7 मीटर
- 33 KV से ऊपर एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज: 3.7 मीटर + प्रत्येक अतिरिक्त 33 KV के लिए 0.3 मीटर।
ढालू छत (Pitched Roof) के लिए हाई वोल्टेज क्लीयरेंस:
- 11 KV तक वर्टिकल क्लीयरेंस: 1.2 मीटर
- 11 KV से 33 KV के बीच: 2.2 मीटर
- 33 KV से ऊपर: 2 मीटर + प्रत्येक अतिरिक्त 33 KV के लिए 0.3 मीटर।
🔹 Rule 85: खंभों के बीच की अधिकतम दूरी (Support Interval) खंभों के बीच की दूरी 65 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, सिवाय इंस्पेक्टर की पूर्व अनुमति के।
🔌 आंतरिक वायरिंग से संबंधित नियम (Internal Wiring Rules)
- कंडक्टर का आकार: घरेलू वायरिंग में तांबे (Copper) के तार का साइज 1/1.12 mm और एल्युमीनियम के तार का साइज 1/1.40 mm (1.5 mm²) से कम नहीं होना चाहिए। 📏
- फ्लेक्सिबल तार: फ्लेक्सिबल तारों के लिए न्यूनतम आकार 14/0.193 mm है।
- बोर्ड की ऊंचाई: मीटर बोर्ड और मेन स्विच बोर्ड जमीन से 1.5 मीटर की ऊंचाई पर होने चाहिए। 🪜
- केसिंग रन: केसिंग (Casing) को जमीन से 3.0 मीटर की ऊंचाई पर चलाया जाना चाहिए।
- लाइट ब्रैकेट: लाइट ब्रैकेट 2 से 2.5 मीटर की ऊंचाई पर लगाए जाने चाहिए। 💡
- सब-सर्किट पॉइंट्स: एक सब-सर्किट (Sub circuit) में पॉइंट्स की अधिकतम संख्या 10 होती है।
- सर्किट लोड: एक सब-सर्किट में अधिकतम लोड 800W होना चाहिए। 🔌
📉 वोल्टेज ड्रॉप और इंसुलेशन नियम (Voltage Drop Concepts)
🔹 I.E. Rule 48: वायरिंग और अर्थ (Earth) के बीच Insulation Resistance इतना होना चाहिए कि लीकेज करंट (Leakage Current) फुल लोड करंट के 1/50000 हिस्से या 0.02% से अधिक न हो।
🔹 वोल्टेज ड्रॉप की सीमा:
- लाइटिंग सर्किट (Lighting Circuit): सप्लाई वोल्टेज का 2% + 1 वोल्ट तक अनुमति है।
- पावर इंडस्ट्रियल सर्किट (Power Circuit): घोषित सप्लाई वोल्टेज के 5% से अधिक नहीं होना चाहिए।
- इंसुलेशन रेजिस्टेंस: किसी भी वायरिंग इंस्टॉलेशन का रेजिस्टेंस 1 MΩ (1 Mega Ohm) से कम नहीं होना चाहिए। 🛡️
- Earth Resistance की वैल्यू एक ओम (1 ohm) से अधिक नहीं होनी चाहिए। (The earth resistance should not exceed the value of one ohm.)
Note: सिस्टम की सुरक्षा के लिए कम रेजिस्टेंस होना बहुत जरूरी है ताकि लीकेज करंट आसानी से जमीन में जा सके।
📜 I.E. Rules regarding to Power Wiring (पावर वायरिंग के संबंध में I.E. नियम):
पावर वायरिंग करते समय निम्नलिखित Indian Electricity (I.E.) Rules का पालन करना अनिवार्य है:
लोड और आउटलेट की सीमा (Load and Outlet Limits): 🔌 एक Power Sub-circuit में लोड आमतौर पर 3000 वॉट (3000 watts) तक ही सीमित रखा जाता है। इसके अलावा, प्रत्येक सब-सर्किट में आउटलेट्स (outlets) की संख्या दो (2) से अधिक नहीं होनी चाहिए।
उपकरण और वायरिंग का प्रकार (Equipment and Wiring Type): 🛠️ पावर वायरिंग में उपयोग किए जाने वाले सभी उपकरण Iron Clad Construction (लोहे के आवरण वाले) होने चाहिए। वायरिंग के लिए हमेशा Armoured Cable या Conduit Type वायरिंग का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
फ्लेक्सिबल कंड्यूट की लंबाई (Length of Flexible Conduit): 📏 मोटर्स और स्टार्टर्स (starters), या स्विच और मोटर्स के टर्मिनल बॉक्स (terminal boxes) के बीच कनेक्शन के लिए उपयोग किए जाने वाले Flexible Conduit की लंबाई 1.25 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
स्विच फ्यूज की व्यवस्था (Provision of Switch Fuse): 🛡️ प्रत्येक मोटर को, चाहे उसका आकार (size) कुछ भी हो, उसके पास एक Switch Fuse प्रदान किया जाना चाहिए ताकि आपातकालीन स्थिति में उसे तुरंत बंद किया जा सके।
कंडक्टर का न्यूनतम एरिया (Minimum Cross-sectional Area of Conductor): 🧵 पावर वायरिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले कंडक्टर का न्यूनतम क्रॉस-सेक्शनल एरिया (Area):
- Copper Conductor Cables के लिए: 1.25 mm
- Aluminium Conductor Cables के लिए: 1.50 mm (यह ISI की सिफारिशों के अनुसार है)। अतः, 3/0.915 mm Copper या 1/1.80 mm Aluminium से छोटे साइज के VIR या PVC केबल्स का उपयोग मोटर वायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता है।
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Instructor Note: छात्रों, इन accessories को पहचानना और उनकी रेटिंग समझना electrical engineering की बुनियाद है। सुरक्षा नियमों (IE Rules) का पालन हमेशा अनिवार्य है! ⚠️

