💡 Construction Details of Various Lamps (विभिन्न लैम्पों के निर्माण का विवरण) 💡

Power Electrician – Illumination (पावर इलेक्ट्रीशियन – इल्यूमिनेशन)


🎯 पाठ के उद्देश्य (Objectives):

इस लेसन के अंत में आप निम्नलिखित विषयों को समझने में सक्षम होंगे:

  • Neon sign tubes की बनावट (construction) और कार्यप्रणाली (working) को समझाना।
  • Neon signs के कलर मैकेनिज्म (colour mechanism) की व्याख्या करना।

🔌 गैस डिस्चार्ज लैंप (Gas Discharge Lamp)

एक Gas Discharge Lamp वह होता है जिसमें एक कांच की ट्यूब (glass tube) के अंदर कोई Inert Gas (अक्रिय गैस) भरी होती है। इस ट्यूब के दोनों सिरों पर Electrodes को सील किया जाता है। जब इसे गर्म किया जाता है, तो यह अपने अंदर से Electrons के प्रवाह (flow) की अनुमति देता है।

  • कार्यप्रणाली (Working): इलेक्ट्रॉनों का निरंतर प्रवाह प्राप्त करने के लिए, गैस को पहले चार्ज किया जाता है। जैसे ही बल्ब से सप्लाई काट दी जाती है, गैस Discharge हो जाती है। इसे ही Electric Gas Discharge Lamp कहा जाता है।

Electric Gas Discharge Lamps मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:

  1. Cold Cathode Lamp (कोल्ड कैथोड लैंप)
  2. Hot Cathode Lamp (हॉट कैथोड लैंप)

✅ Cold Cathode Lamps के उदाहरण: (i) Neon lamp, (ii) Neon sign tubes, (iii) Sodium vapour lamp.

✅ Hot Cathode Lamps के उदाहरण: (i) Mercury vapour lamp (medium pressure), और (ii) Fluorescent tube (low pressure mercury vapour lamp).


🔴 नियॉन लैंप (Neon Lamp)

यह एक Cold Cathode Lamp है जैसा कि चित्र 1 (Fig 1) में दिखाया गया है। इसमें कम दबाव (low pressure) पर Neon Gas का उपयोग किया जाता है।

🏗️ बनावट (Construction):

  • इस लैंप में, दो Flat या Spiral Electrodes को एक कांच के बल्ब के अंदर एक-दूसरे के पास रखा जाता है।
  • इसे कम वोल्टेज जैसे कि 150V DC या 110V AC पर संचालित किया जा सकता है।
  • सप्लाई देने पर, गैस Ionised (आयनित) हो जाती है और Reddish Colour (लाल रंग) का प्रकाश उत्सर्जित करती है।
  • आमतौर पर, इलेक्ट्रोड्स के साथ सीरीज (series) में एक 2000Ω Resistance जोड़ा जाता है, जो लैंप के कैप में स्थित होता है। यह पोटेंशियल डिफरेंस में बदलाव के कारण होने वाले करंट के उतार-चढ़ाव (Fluctuation) को कम करता है।

🛠️ उपयोग (Uses):

  • Neon Lamp का उपयोग मुख्य रूप से Indicator Lamp के रूप में किया जाता है ताकि बिजली की उपस्थिति का पता चल सके।
  • यह कम रोशनी देता है, इसलिए इसे Night Lamp की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इस प्रकार का लैंप Testing Pencil (टेस्टर) में भी होता है, जो 0.5 W का होता है।

🗼 नियॉन साइन ट्यूब (Neon Sign Tube)

🏗️ नियॉन साइन ट्यूब की बनावट (Construction of Neon Sign Tube):

Neon sign tube लैंप का उपयोग ज्यादातर Advertising (विज्ञापनों) के लिए किया जाता है। जैसा कि चित्र 2 (Fig 2) में दिखाया गया है, यह कांच की बनी होती है।

  • Size (आकार): इन ट्यूबों की लंबाई 1 मीटर से 5 मीटर तक होती है और व्यास (diameter) 10 मिमी से 20 मिमी के बीच होता है।
  • Electrodes: ट्यूबों को इलेक्ट्रोड्स से जोड़ा जाता है जो High Voltage पर काम करते हैं। अधिक लंबाई या अलग-अलग अक्षरों (letters) को बनाने के लिए इलेक्ट्रोड्स को Nickel Wires से जोड़ा जाता है (Fig 3)।

🔬 इलेक्ट्रोड का विवरण (Details of Electrode):

इलेक्ट्रोड का आकार बेलनाकार (Cylindrical) होता है और ये Nickel, Iron या Copper के बने होते हैं। एक इलेक्ट्रोड में निम्नलिखित भाग होते हैं:

  • एक ग्लास शेल (A glass shell)
  • लीड इन वायर्स (Lead in wires)
  • एक ग्लास जैकेट सील (A glass jacket seal)
  • एक सिरेमिक कॉलर (A ceramic collar) – जो गर्मी को रोकने वाली सामग्री है।

⚙️ असेंबली और ऑपरेशन (Assembly and Operation):

इलेक्ट्रोड्स को ट्यूब के सिरों पर फिट करके फ्यूज कर दिया जाता है। अक्रिय गैस (जैसे Neon या Helium) भरने से पहले ट्यूब के अंदर Vacuum (वैक्यूम) बनाया जाता है। इसके बाद इसे सील कर दिया जाता है। ट्यूब की लंबाई के आधार पर Neon Sign Tube को चलाने के लिए 2000V से 15000V तक की आवश्यकता होती है।

Neon Sign Tube की कार्यप्रणाली (Working of Neon Sign Tube) 💡

Neon sign tube को चलने के लिए एक उच्च वोल्टेज (high voltage) की आवश्यकता होती है। (चित्र 4 देखें) यह उच्च वोल्टेज एक लीकेज फील्ड ट्रांसफार्मर (leakage field transformer – T) द्वारा प्राप्त किया जाता है, जो एक ही समय में करंट को सीमित (limit) करने का कार्य भी करता है। नियॉन ट्यूब का रंग (colour) और तापमान (temperature) उसके अंदर भरी हुई गैस पर निर्भर करता है। हम विभिन्न फ्लोरोसेंट पदार्थों (fluorescent materials) का उपयोग करके अलग-अलग रंग प्राप्त कर सकते हैं।

जब इलेक्ट्रोड (electrodes) के बीच हाई वोल्टेज लगाया जाता है, तो पॉजिटिव आयन (positive ions) और इलेक्ट्रॉन (electrons) क्रमशः कैथोड (cathode) और एनोड (anode) की ओर बहने लगते हैं। पोटेंशियल (potential) बढ़ने के साथ इलेक्ट्रॉनों की गति भी बढ़ती है और वे बहुत उच्च वेग (very high velocity) प्राप्त कर लेते हैं। इलेक्ट्रॉनों की यह तेज गति प्राकृतिक परमाणुओं (natural atoms) के साथ टक्कर (collision) पैदा करती है और उनसे इलेक्ट्रॉनों को अलग कर सकती है।

इलेक्ट्रॉनों का यही उच्च वेग प्रकाश (luminous discharge) पैदा करने के लिए जिम्मेदार होता है। नियॉन साइन लैंप का स्ट्राइकिंग वोल्टेज (striking voltage), इसके ऑपरेटिंग वोल्टेज (operating voltage) से लगभग 1.5 गुना अधिक होता है, जिसे R.F. चोक ‘L’ (R.F. choke ‘L’) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। (चित्र 4)


सर्किट का विवरण और संचालन (Circuit Description and Operation) 🔌

  1. Step-up transformer: स्टेप-अप ट्रांसफार्मर का उपयोग हाई वोल्टेज प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इसके सेंटर टैप (centre tap) को अर्थ (earthed) किया जाता है। सेकेंडरी आउटपुट वोल्टेज को सीधे नियॉन लैंप (neon lamp) से जोड़ा जाता है।
  2. R.F. choke L: इसे लीकेज ट्रांसफार्मर की प्राइमरी (primary) के साथ सीरीज में जोड़ा जाता है ताकि नियॉन लैंप के सर्ज करंट (surge current) को सीमित किया जा सके। (चित्र 4)
  3. Capacitor C: इसे पावर फैक्टर (power factor) में सुधार करने के लिए ट्रांसफार्मर की प्राइमरी के समानांतर (across) जोड़ा जाता है।
  4. Fireman switch S2: इसे मुख्य स्विच (main switch) के साथ जोड़ा जाता है और इसका उपयोग आपातकालीन स्विच (emergency switch) के रूप में किया जाता है। (चित्र 4)
  5. Main switches: सर्किट को कंट्रोल करने के लिए सामान्यतः 15A 250V ICDP स्विच का उपयोग किया जाता है।
  6. H.T. cables: IE नियम संख्या 71 (IE rule No 71) के अनुसार, नियॉन साइन लैंप को ट्रांसफार्मर की सेकेंडरी से जोड़ने के लिए H.T. केबल्स का उपयोग किया जाता है।

Neon Sign Lamp का रंग तंत्र (Colour Mechanism of Neon Sign Lamp) 🌈

जब गैस या वाष्प (vapour) के माध्यम से विद्युत धारा (electric current) प्रवाहित की जाती है, तो यह चमकदार रोशनी (luminous light) पैदा करती है। गैसीय डिस्चार्ज (gaseous discharge) द्वारा प्रकाश उत्पन्न करने की इस प्रक्रिया में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले तत्व नियॉन (neon) या मरकरी (mercury) हैं।

नियॉन डिस्चार्ज नारंगी-लाल (orange-red) रोशनी देता है, जो विज्ञापन बोर्डों (advertising signs) के लिए बहुत लोकप्रिय है। ट्यूबों में नियॉन का दबाव (pressure) आमतौर पर 3 से 20 mm Hg (millimeter of mercury) के बीच होता है।

फ्लोरोसेंट पाउडर के उपयोग से प्राप्त अंतिम रंग न केवल पाउडर की रासायनिक संरचना (chemical composition) पर निर्भर करता है, बल्कि निम्न बातों पर भी निर्भर करता है:

  • भरी गई गैस का प्रकार।
  • गैस का दबाव (pressure)।
  • ट्यूब का व्यास (diameter)।
  • ऑपरेटिंग करंट (operating current)।

रंग तंत्र – तालिका (Colour Mechanism – Table) 📊

| क्र.सं. | बेसिक पाउडर (Basic powder) | प्राप्त रंग (Colour) | | :— | :— | :— | | 1 | कैल्शियम टंगस्टेट (Calcium tungstate) | नीला (Blue) | | 2 | मैग्नीशियम टंगस्टेट (Magnesium tungstate) | नीला-सफेद (Blue-white) | | 3 | कैल्शियम सिलिकेट (Calcium silicate) | गुलाबी (Pink) | | 4 | जिंक सिलिकेट (Zinc silicate) | हरा (Green) | | 5 | जिंक बेरिलियम सिलिकेट (Zinc beryllium silicate) | पीला, सफेद, गुलाबी (एक्टिवेटिंग एजेंट के आधार पर) | | 6 | कैडमियम सिलिकेट (Cadmium silicate) | पीला, गुलाबी (Yellow, pink) | | 7 | कैडमियम बोरेट (Cadmium borate) | गुलाबी (Pink) |


स्थापना (Installation) 🛠️

सभी उपकरणों को अर्थ किए गए धातु के बक्से (earthed metal) या हाई वोल्टेज के लिए उपयुक्त मजबूत कंटेनरों में रखा जाना चाहिए। I.E. रेगुलेशन संख्या 71 के अनुसार, उपकरण के पास ‘Danger-High Voltage’ का नोटिस स्थायी रूप से लगाया जाना चाहिए।


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Note to Students: कृपया चित्रों (Fig 1, 2, 3) को ध्यान से देखें ताकि आप इलेक्ट्रोड की बनावट और ट्यूब के कनेक्शन को बेहतर ढंग से समझ सकें।