1.2.17-19 इलेक्ट्रिक सप्लाय के प्रकार (Types of Electrical Supply)

🔌 इलेक्ट्रिकल सप्लाई के प्रकार (Types of Electrical Supply)

📝 मुख्य उद्देश्य (Learning Objectives)

इस लेसन को पढ़ने के बाद आप: ✅ इलेक्ट्रिकल सप्लाई के प्रकार बता पाएंगे। ✅ AC और DC करंट के बीच अंतर समझ पाएंगे। ✅ DC सोर्स की पोलैरिटी (Polarity) पहचानने का तरीका जानेंगे। ✅ इलेक्ट्रिक करंट के प्रभावों को समझ सकेंगे।

सप्लाई मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:

 AC सप्लाई (Alternating Current) 〰️

इसका उपयोग विभिन्न तकनीकी कार्यों के लिए किया जाता है। AC को सिंबल ( ~ ) द्वारा दर्शाया जाता है।

 DC सप्लाई (Direct Current) ➖

DC सप्लाई के मुख्य स्रोत सेल (Cells), बैटरी (Batteries) और DC जनरेटर (Dynamos) होते हैं।

  • सिंबल: इसे सीधी रेखा ( — ) से दर्शाया जाता है।
  • विशेषता: DC वोल्टेज का परिमाण (Magnitude) स्थिर रहता है। सप्लाई शुरू करने से लेकर बंद करने तक इसकी पोलैरिटी (Polarity) नहीं बदलती।

🔋  विभिन्न DC स्रोत (Various DC Sources) – Fig 1

चित्र 1 (Fig 1) में हमें DC वोल्टेज के अलग-अलग स्रोत दिखाए गए हैं:

  • (a) General Purpose Cell: यह एक सामान्य सेल है जो 1.5V प्रदान करता है।
  • (b) Battery: कई सेल्स को मिलाकर एक बैटरी बनती है।
  • (c) DC Generator: यह यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) को DC विद्युत ऊर्जा में बदलता है।

📈  लीनियर वोल्टेज विशेषता (Linear Voltage Characteristic) – Fig 2

Fig 2 में Linear Voltage Characteristic को ग्राफ के माध्यम से दिखाया गया है:

  • DC वोल्टेज की सबसे बड़ी खूबी यह है कि समय (Time) बीतने के साथ इसका मान (Value) स्थिर रहता है।
  • ग्राफ में आप देख सकते हैं कि Voltage (V) की रेखा समय (X-axis) के समानांतर (Parallel) है, जिसका मतलब है कि इसमें कोई बदलाव नहीं होता।

🔄  करंट की दिशा और ध्रुवीयता (Direction of Current and Polarity) – Fig 3

Direct Voltage की Polarity (ध्रुवीयता) निश्चित होती है:

  • इसे Positive (+ve) और Negative (-ve) के रूप में जाना जाता है।
  • Current Flow: पारंपरिक रूप से करंट का प्रवाह स्रोत (Source) के बाहर हमेशा Positive (+) टर्मिनल से Negative (-) टर्मिनल की ओर होता है।
  • Direct Current (DC): स्विच ऑन करने से लेकर स्विच ऑफ करने तक, करंट का मान (Value) एक समान रहता है। इसे ही हम सामान्य भाषा में DC करंट कहते हैं। 🔌

🔌  AC सप्लाई के स्रोत (Sources of AC Supply) – Fig 4

Fig 4 में विभिन्न AC स्रोत दिखाए गए हैं:

  • (a) AC Generator (Alternator): यह AC सप्लाई पैदा करने का मुख्य स्रोत है।
  • (b) Transformer: ट्रांसफार्मर से मिलने वाली सप्लाई भी AC होती है।

🌊  अल्टरनेटिंग वोल्टेज (Alternating Voltage) – Fig 5

Alternating Voltage वह वोल्टेज है जो अपनी Polarity और परिमाण (Magnitude) को लगातार बदलता रहता है:

  • हमारे घरों में पावर प्लांट से आने वाली सप्लाई Alternating होती है।
  • Wave-form: Fig 5 एक Sinusoidal Alternating Voltage (साइन वेव) को दर्शाता है।
  • Frequency (F): एक सेकंड में वोल्टेज जितनी बार अपनी दिशा बदलता है, उसे फ्रीक्वेंसी कहते हैं। इसकी इकाई Hertz (Hz) होती है। 🌀
  • Terminals: AC सप्लाई में टर्मिनल्स को Phase/Line (L) और Neutral (N) के रूप में मार्क किया जाता है।

📉  अल्टरनेटिंग करंट (Alternating Current) – Fig 6

जब किसी इलेक्ट्रिक सर्किट में Alternating Voltage लगाया जाता है, तो उसमें प्रवाहित होने वाला करंट Alternating Current (AC) कहलाता है।

  • Fig 6 में आप देख सकते हैं कि करंट का मान (Magnitude) समय के साथ बढ़ता और घटता है और अपनी दिशा (+ और -) बदलता रहता है।

🔍  DC में पोलरिटी टेस्ट (Polarity Test in DC)

DC सप्लाई स्रोत की पहचान करना बहुत जरूरी है:

  • हमें यह पता होना चाहिए कि कौन सा टर्मिनल Positive है और कौन सा Negative
  • यह इसलिए जरूरी है ताकि हम बिजली के उपकरणों (Electric Devices) को सप्लाई के साथ सही तरीके से जोड़ सकें। 🛠️

🔋 ध्रुवीयता का महत्व (Importance of the Polarity)

Direct Current (DC) supply की ध्रुवीयता (polarity) निश्चित होती है, जिसे धनात्मक (positive) को ‘+’ और ऋणात्मक (negative) को ‘-‘ के रूप में चिह्नित किया जाता है। जिन इलेक्ट्रिक उपकरणों के टर्मिनल्स पर ये चिह्न होते हैं, उन्हें Polarised कहा जाता है।

  • उदाहरण (Example): जैसा कि Fig 7 में दिखाया गया है, जब हम एक ट्रांजिस्टर रेडियो में नए सेल डालते हैं, तो हमें उन्हें सही ढंग से लगाना चाहिए। सेल का धनात्मक टर्मिनल (positive terminal) रेडियो के धनात्मक टर्मिनल से और ऋणात्मक टर्मिनल (negative terminal) रेडियो के ऋणात्मक टर्मिनल से जुड़ना चाहिए।
  • सावधानी: हमें सही पोलरिटी मार्किंग का पालन करना चाहिए। यदि पोलरिटी सही नहीं देखी गई (यानी, +ve को -ve से जोड़ दिया गया), तो उपकरण काम नहीं करेगा और खराब (damage) भी हो सकता है। ⚠️

💡 विद्युत धारा के प्रभाव (Effects of Electric Current)

जब किसी सर्किट से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसे उसके प्रभावों (effects) से पहचाना जाता है, जो नीचे दिए गए हैं:

  1. रासायनिक प्रभाव (Chemical effect): 🧪 जब एक इलेक्ट्रिक करंट किसी प्रवाहकीय तरल (conducting liquid) जैसे कि Electrolyte (अम्लीय जल) से गुजरता है, तो यह रासायनिक क्रिया के कारण अपने घटकों (constituents) में विघटित हो जाता है। इसका उपयोग Electroplating, बैटरी चार्जिंग और मेटल रिफाइनरी आदि में किया जाता है।

  2. ऊष्मीय प्रभाव (Heating effect): 🔥 जब किसी कंडक्टर पर इलेक्ट्रिक पोटेंशियल (electric potential) लगाया जाता है, तो इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह का प्रतिरोध (resistance) द्वारा विरोध किया जाता है और इस प्रकार कुछ गर्मी (heat) पैदा होती है। इसका उपयोग Electric irons, Heaters और Electric lamps में किया जाता है।

  3. चुंबकीय प्रभाव (Magnetic effect): 🧲 जब किसी करंट ले जाने वाले तार (current carrying wire) के पास चुंबकीय सुई (magnetic compass) रखी जाती है, तो वह विक्षेपित (deflect) हो जाती है। यदि तार को लोहे की कोर (iron core) पर लपेटा जाए, तो वह Electro-magnet बन जाता है। इसका उपयोग Electric bells, Motors और Fans में होता है।

  4. गैस आयनीकरण प्रभाव (Gas ionization effect): 💡 जब इलेक्ट्रॉन कांच की ट्यूब में सील की गई एक निश्चित गैस से गुजरते हैं, तो वह आयनित (ionised) हो जाती है और प्रकाश उत्सर्जित करने लगती है। जैसे: Fluorescent tubes, Mercury vapour lamps और Neon lamps

  5. विशेष किरणों का प्रभाव (Special rays effect): ⚡ इलेक्ट्रिक करंट के माध्यम से X-rays और Laser rays जैसी विशेष किरणें भी विकसित की जा सकती हैं।

  6. झटके का प्रभाव (Shock effect): ⚡😵 मानव शरीर के माध्यम से करंट का प्रवाह एक गंभीर झटका (severe shock) या मृत्यु का कारण बन सकता है। हालांकि, नियंत्रित मान (controlled value) पर, इसका उपयोग मानसिक रोगियों के उपचार के लिए मस्तिष्क को हल्के झटके देने के लिए किया जा सकता है।


 

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Instructor Note: “छात्रों, कृपया Fig 7 का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें और कंडक्टर और इंसुलेटर के बीच के अंतर को अपनी नोटबुक में नोट करें।” 📝✍️


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Instructor Note: छात्रों को चित्र (Fig 1 to 6) दिखाकर समझाएं कि कैसे DC में ग्राफ सीधा रहता है और AC में वेव (Wave) के रूप में चलता है। यह विजुअल लर्निंग उन्हें लंबे समय तक याद रखने में मदद करेगी। 👨‍🏫


 


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आशा है यह लेसन आपके लिए मददगार साबित होगा! अगर आपके कोई सवाल हैं, तो नीचे कमेंट करें। 👨‍🏫💡