⚡ R और L श्रेणी (Series) में A.C. सर्किट (A.C. circuit with R & L in series)
🎯 उद्देश्य (Objectives):
इस पाठ के अंत में आप निम्न कार्य करने में सक्षम होंगे:
- ✅ वोल्टेज और करंट के संबंध (Voltage and Current relationship) को बताना।
- ✅ RL सीरीज सर्किट की प्रतिबाधा (Impedance) निर्धारित करना।
- ✅ RL सीरीज सर्किट में शक्ति (Power) की गणना करना।
- ✅ RL सीरीज सर्किट में पावर फैक्टर (Power Factor) की गणना करना।
📖 विषय परिचय (Introduction)
जब Resistance (प्रतिरोध) और Inductance (प्रेरकत्व) को सीरीज (श्रेणी) में जोड़ा जाता है, या रेजिस्टेंस वाली एक कॉइल (Coil) के मामले में, RMS करंट ($I_L$) को $X_L$ और $R$ दोनों द्वारा सीमित (limit) किया जाता है। हालांकि, करंट $I$ दोनों $X_L$ और $R$ में एक समान रहता है क्योंकि वे सीरीज में जुड़े होते हैं।
- Voltage Drop across R: $V_R = IR$ होता है।
- Voltage Drop across $X_L$: $V_L = IX_L$ होता है।
$X_L$ से होकर बहने वाला करंट $I$, वोल्टेज $V_L$ से $90^\circ$ पीछे (lag) रहना चाहिए, क्योंकि यह एक इंडक्टेंस और उसके स्व-प्रेरित वोल्टेज (self-induced voltage) के बीच का फेज एंगल (Phase Angle) है। रेजिस्टेंस $R$ से बहने वाला करंट $I$ और उसका वोल्टेज ड्रॉप $V_R$ दोनों एक ही फेज (In-phase) में होते हैं, इसलिए उनके बीच फेज एंगल $0^\circ$ होता है। 📐
आइए अब हम शुद्ध रेजिस्टेंस (Pure Resistance) और शुद्ध इंडक्टेंस (Pure Inductance) वाले सीरीज सर्किट के लिए फेजर रिप्रेजेंटेशन (Phasor Representation) के सिद्धांत को लागू करें। (Fig 1 देखें)
📉 फेजर आरेख (Phasor Diagram) का विवरण
चूँकि हम एक सीरीज सर्किट (Series Circuit) पर विचार कर रहे हैं, इसलिए करंट फेजर (Current Phasor) को हॉरिजॉन्टल रेफरेंस पोजीशन (Horizontal reference position) में खींचना सुविधाजनक है क्योंकि यह रेजिस्टर और इंडक्टर दोनों के लिए ‘कॉमन’ (Common) है।
इस फेजर के ऊपर रेजिस्टर के वोल्टेज फेजर $V_R$ को रखा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक शुद्ध रेजिस्टर (Pure Resistor) में करंट और वोल्टेज हमेशा एक-दूसरे के साथ फेज (In phase) में होते हैं। (Fig 2 देखें) 📏
इसी तरह, इंडक्टर के वोल्टेज फेजर $V_L$ को करंट $I$ से $90^\circ$ आगे खींचा जाता है, दूसरे शब्दों में, यह करंट फेजर से लीड (Leading) करता है। इसका कारण यह है कि जैसा कि हम जानते हैं, एक शुद्ध इंडक्टेंस में करंट हमेशा इंडक्टर वोल्टेज से $90^\circ$ पीछे (Lags) रहता है।
📐 वोल्टेज का योग (Addition of Voltages)
हालांकि, ये दो वोल्टेज ($V_R$ और $V_L$) एक-दूसरे से $90^\circ$ आउट ऑफ फेज (Out of phase) होते हैं। इसका मतलब है कि सीरीज कॉम्बिनेशन में कुल वोल्टेज (Total Voltage) को केवल $V_R$ और $V_L$ को गणितीय रूप से जोड़कर प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हमें उनके बीच के कोण (Angle) को ध्यान में रखना होगा।
लागू किया गया वोल्टेज $V$, फेजर योग (Phasor sum) होता है जिसमें फेज एंगल जुड़ा होता है।
यह फेजर जोड़ एक पैरेललोग्राम (Parallelogram) – (इस मामले में एक वर्ग) बनाकर और उसका विकर्ण (Diagonal) खींचकर आसानी से किया जा सकता है। यह Fig 3 में दिखाया गया है। स्पष्ट रूप से, फेजर योग $V$, $V_L$ और $V_R$ के बीजगणितीय योग (Algebraic sum) से कम है। इसके अलावा, क्योंकि $V$ एक समकोण त्रिभुज (Right-angled triangle) का कर्ण (Hypotenuse) है, इसलिए $V$ को इस प्रकार दिया जाता है:
$$V^2 = V_R^2 + V_L^2$$
⚡ सीरीज RL सर्किट की प्रतिबाधा (Impedance of a series RL circuit)
सीरीज RL सर्किट में करंट के कुल विरोध (Total opposition) को इम्पीडेंस (Impedance – Z) कहा जाता है। यह कुल लागू वोल्टेज $V$ और करंट $I$ का अनुपात (Ratio) है। इम्पीडेंस को ओहम (Ohms) में मापा जाता है, ठीक वैसे ही जैसे रेजिस्टेंस और इंडक्टिव रिएक्टेंस को मापा जाता है। लेकिन, जैसा कि निम्नलिखित द्वारा दिखाया गया है, इम्पीडेंस रेजिस्टेंस और रिएक्टेंस का वेक्टर योग (Vector sum) है।
सीरीज RL सर्किट के लिए ‘वोल्टेज ट्रायंगल’ (Voltage Triangle) पर विचार करें, जैसा कि Fig 4 में दिखाया गया है। दिया गया है: $V^2 = V_R^2 + V_L^2$ और $V_R = IR$ और $V_L = IX_L$
नीचे दी गई इमेज के आधार पर हम AC circuit में वोल्टेज, इम्पीडेंस (Impedance) और पावर फैक्टर (Power factor) की गणना करना सीखेंगे।
वोल्टेज ट्रायंगल (Voltage Triangle) और वोल्टेज की गणना 📐
Fig 4 (a) में Voltage Triangle दिखाया गया है। यदि हम पाइथागोरस प्रमेय (Pythagoras theorem) का उपयोग करें, तो कुल वोल्टेज ($V$) इस प्रकार होगा:
तो (then), $$V = \sqrt{(IR)^2 + (IX_L)^2}$$ $$V = \sqrt{I^2R^2 + (I^2X_L)^2}$$ (नोट: यहाँ इमेज के अनुसार $I^2$ को कॉमन लिया गया है) $$V = \sqrt{I^2(R^2 + X_L^2)}$$ $$V = I\sqrt{R^2 + X_L^2}$$ और $$\frac{V}{I} = \sqrt{R^2 + X_L^2}$$
इम्पीडेंस (Impedance – Z) क्या है? 🔍
लेकिन (But), $\frac{V}{I}$ को ही Impedance (इम्पीडेंस) Z कहा जाता है।
इसलिए (Therefore), $$Z = \sqrt{R^2 + X_L^2} \text{ ohms}$$
जहाँ:
- Z = ओहम्स (ohms) में Impedance है।
- R = ओहम्स (ohms) में Resistance है।
- $X_L$ = ओहम्स (ohms) में Inductive Reactance है।
और करंट (Current) $I = \frac{V}{Z}$ एम्पियर (amperes – A) होता है।
पावर फैक्टर (Power Factor) की परिभाषा 💡
Power factor: किसी AC circuit को डिलीवर की गई True power (वास्तविक शक्ति) और सोर्स द्वारा सप्लाई की गई Apparent power (आभासी शक्ति) के अनुपात (ratio) को लोड का ‘पावर फैक्टर’ कहा जाता है।
यदि हम Fig 7 की तरह किसी भी पावर ट्रायंगल (power triangle) की जांच करें, तो हम देखते हैं कि True power और Apparent power का अनुपात कोण $\phi$ (angle phi) का cosine होता है।
Power factor के सूत्र (Formulas):
- $\text{Power factor} = \frac{W}{VA} = \cos \phi$
- पावर फैक्टर (power factor) इसके भी बराबर होना चाहिए: $\frac{V_R}{V}$ और $\frac{R}{Z}$
- अतः, $\text{Power factor (PF)} = \frac{W}{VA} = \frac{V_R}{V} = \frac{R}{Z} = \cos \phi$
विशेष स्थितियां (Special Cases) ⚠️
- Pure Resistance (शुद्ध प्रतिरोध) के लिए: केवल शुद्ध प्रतिरोध वाले सर्किट के लिए पावर फैक्टर क्या होना चाहिए? चूंकि करंट और वोल्टेज के बीच फेज एंगल (phase angle) $\phi = 0$ होता है।
- $\cos \phi = 1$ और $PF = 1$ (इसे Unity Power Factor कहते हैं)।
- Pure Inductance/Capacitance के लिए: इसी तरह, केवल शुद्ध इंडक्टेंस या शुद्ध कैपेसिटेंस वाले सर्किट के लिए पावर फैक्टर शून्य (zero) होता है, क्योंकि:
- $\cos \phi = \cos 90^\circ = \text{zero}$।
उदाहरण (Example Problem) – हल के साथ 📝
सवाल (Example): एक इंडक्टिव सर्किट (inductive circuit) में $2\text{ ohms}$ का रेजिस्टेंस है जो $0.015\text{ henry}$ के इंडक्टेंस के साथ सीरीज में जुड़ा है। यदि इसे $200\text{ volt}$, $50\text{ cycles per second}$ (Hz) की सप्लाई से जोड़ा जाए, तो (i) Current और (ii) Power factor ज्ञात करें।
हल (Solution):
सबसे पहले Inductive Reactance ($X_L$) निकालें: $$X_L = 2\pi fL = 2 \times 3.142 \times 50 \times 0.015 = 4.71\text{ ohms}$$
अब Impedance (Z) निकालें: $$Z = \sqrt{R^2 + X_L^2} = \sqrt{(2)^2 + (4.71)^2}$$ $$Z = \sqrt{4 + 17.39} = \sqrt{26.19} = 5.11\text{ ohms}$$
(i) Current (I) की गणना: $$I = \frac{V}{Z} = \frac{200}{5.11} = 39.13\text{ amps}$$ ✅
(ii) Power factor की गणना: $$\text{Power factor} = \frac{R}{Z} = \frac{2}{5.11} = 0.39$$ ✅
🔢 वैकल्पिक गणना (Alternately Calculations)
Power (शक्ति) को हम अलग-अलग फॉर्मूला का उपयोग करके निकाल सकते हैं:
-
P = I²R = 0.4 x 0.4 x 625 = 100 watts
-
या P = E² / R = 250² / 625 = (250 × 250) / 625 = 100 watts
चूंकि Current और Voltage दोनों एक ही Phase में हैं, इसलिए इनका Phase Angle शून्य (zero) है और Power Factor Unity (एक) है। इसीलिए, Power की गणना सीधे Voltage और Current के द्वारा की जा सकती है। ✅
🌀 शुद्ध प्रेरकत्व में शक्ति (Power in Pure Inductance)
यदि किसी AC Circuit में केवल Inductance है, तो Voltage और Current एक-दूसरे से 90° Out of Phase होते हैं। इस स्थिति में, Voltage और Current के तात्कालिक मूल्यों (Instantaneous values) का गुणनफल (Product) पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों Power देता है। इसका शुद्ध परिणाम (Net result): एक Pure Inductive Circuit में खर्च होने वाली कुल Power शून्य (Zero) होती है। 🚫💨
🔋 शुद्ध धारिता में शक्ति (Power in Pure Capacitance)
यदि किसी AC Circuit में केवल Capacitor लगा है, तो यहाँ भी Voltage और Current 90° Out of Phase होते हैं। यहाँ भी Voltage और Current का गुणा करने पर हमें पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों Power मिलती है। इसका शुद्ध परिणाम (Net result): एक Pure Capacitive Circuit में खर्च होने वाली कुल Power शून्य (Zero) होती है। 🚫🔋
🏭 औद्योगिक प्रतिष्ठानों में Power Factor (PF in Industrial Installations)
ज्यादातर औद्योगिक प्रतिष्ठानों (Industrial installations) में Lagging PF (पीछे चलने वाला पावर फैक्टर) होता है। इसका मुख्य कारण बड़ी संख्या में AC Induction Motors का उपयोग है, जो स्वभाव से ही Inductive होती हैं। ⚙️
📉 कम पावर फैक्टर का प्रभाव (Effect of a Low Power Factor)
True Power की एक निश्चित मात्रा के लिए, यदि Load का Power Factor Unity (1) से कम है, तो उसे चलाने के लिए Higher Current की आवश्यकता होती है।
- इस Higher Current का मतलब है कि मोटर को जोड़ने वाले Feeder Wires में अधिक ऊर्जा बर्बाद (Waste) होती है। 🔌🔥
- वास्तव में, यदि किसी औद्योगिक संस्थान का कुल Power Factor 85% (0.85) से कम है, तो बिजली कंपनी द्वारा ‘Power Factor Penalty’ (जुर्माना) लगाया जाता है।
- इसी कारण से, बड़े संस्थानों में Power Factor Correction करना बहुत आवश्यक है। 💰⚠️
🛠️ पावर फैक्टर सुधार (Power Factor Correction)
Load को दी गई Current का सबसे कुशल उपयोग (Efficient use) करने के लिए, हमें High PF या Unity के करीब PF की आवश्यकता होती है। 😊
कम PF आमतौर पर बड़े Induction Loads जैसे डिस्चार्ज लैंप (Discharge lamps), इंडक्शन मोटर, ट्रांसफॉर्मर आदि के कारण होता है। ये उपकरण Lagging Current लेते हैं और गर्मी पैदा करते हैं जो बिना किसी उपयोगी कार्य के वापस जनरेटिंग स्टेशन पर चली जाती है।
सुधार का तरीका: PF को सुधारने के लिए Current को Voltage के जितना संभव हो सके उतने Phase में लाना जरूरी है। यानी Phase Angle (θ) को कम से कम किया जाना चाहिए। यह आमतौर पर एक Capacitor Load लगाकर किया जाता है, जो Leading Current पैदा करता है। 🔄
महत्वपूर्ण निर्देश:
💡 Capacitor को हमेशा Inductive Load के समानांतर (Parallel) जोड़ा जाना चाहिए।
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शिक्षक के लिए निर्देश (Note for Instructor): छात्रों को यह स्पष्ट करें कि सीरीज सर्किट में करंट समान रहता है, इसलिए करंट को ‘रेफरेंस’ माना जाता है। $V_R$ करंट के साथ चलता है, जबकि $V_L$ करंट से $90^\circ$ आगे रहता है। इनका परिणामी (Resultant) ही कुल वोल्टेज $V$ होता है।