विद्युत और संबंधित थ्योरी (Power and Related Theory) ⚡
इलेक्ट्रीशियन: तार, जोड़, सोल्डरिंग और यूजी केबल (Electrician: Wires, Joints, Soldering & UG Cables)
वायर जॉइंट्स – प्रकार – सोल्डरिंग के तरीके (Wire Joints – Types – Soldering Methods) 🛠️
उद्देश्य (Objective): इस लेसन के अंत में आप निम्नलिखित विषयों को समझने में सक्षम होंगे:
- वायर जॉइंट्स के विभिन्न प्रकार (different types of wire joints) और उनके उपयोग बताना।
- सोल्डरिंग की आवश्यकता (necessity of soldering) और सोल्डरिंग के प्रकार बताना।
- फ्लक्स (flux) के उद्देश्य और उसके प्रकारों को स्पष्ट करना।
- सोल्डरिंग की विभिन्न विधियों और तकनीकों (techniques of soldering) को समझाना।
- एल्युमीनियम कंडक्टर को सोल्डर करने के लिए उपयोग किए जाने वाले सोल्डर और फ्लक्स के प्रकार को समझाना।
जॉइंट की परिभाषा (Definition of Joint) 🔗
इलेक्ट्रिकल कंडक्टर में जॉइंट (Joint) का अर्थ है दो या दो से अधिक कंडक्टरों को एक साथ जोड़ना (connecting/tying) या आपस में गूंथना (interlaying)। इसका उद्देश्य यह है कि वह जंक्शन इलेक्ट्रिकली और मैकेनिकली (electrically and mechanically) रूप से पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत हो जाए।
जॉइंट्स के प्रकार (Types of Joints) 📋
इलेक्ट्रिकल वर्क में, जरूरत के आधार पर अलग-अलग प्रकार के जॉइंट्स का उपयोग किया जाता है। किस प्रकार के जॉइंट का उपयोग करना है, यह उस कार्य की सर्विस (service) पर निर्भर करता है।
सामान्यतः उपयोग किए जाने वाले कुछ जॉइंट्स नीचे दिए गए हैं:
- पिग-टेल या रैट-टेल (Pig-tail or rat-tail)
- ट्विस्टेड जॉइंट्स (Twisted joints)
- मैरिड जॉइंट (Married joint)
- टी जॉइंट (Tee joint)
- ब्रिटानिया स्ट्रेट जॉइंट (Britannia straight joint)
- ब्रिटानिया टी जॉइंट (Britannia tee joint)
- वेस्टर्न यूनियन जॉइंट (Western union joint)
- स्कार्फ्ड जॉइंट (Scarfed joint)
- सिंगल स्ट्रैंडेड कंडक्टर में टैप जॉइंट (Tap joint in single stranded conductor)
विस्तृत विवरण (Detailed Description) 📝
पिग-टेल/रैट-टेल/ट्विस्टेड जॉइंट (Pig-tail/Rat-tail/Twisted Joint) 🐭
यह जॉइंट उन जगहों के लिए सबसे उपयुक्त है जहाँ कंडक्टरों पर कोई मैकेनिकल स्ट्रेस (mechanical stress) या खिंचाव नहीं होता है। इसका उपयोग अक्सर जंक्शन बॉक्स (junction box) या कंड्यूट एक्सेसरीज बॉक्स में किया जाता है। हालांकि, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जॉइंट में अच्छी इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (electrical conductivity) बनी रहे।
मैरिड जॉइंट (Married Joint) 💍
मैरिड जॉइंट का उपयोग ऐसी जगहों पर किया जाता है जहाँ जॉइंट के छोटा होने (compactness) के साथ-साथ अच्छी इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी की जरूरत होती है। चूँकि इसकी मैकेनिकल स्ट्रेंथ (mechanical strength) कम होती है, इसलिए इसका उपयोग वहां किया जाता है जहाँ टेंसाइल स्ट्रेस (tensile stress) यानी खिंचाव बहुत अधिक न हो।
टी जॉइंट (Tee Joint) 🔀
इस जॉइंट का उपयोग मुख्य रूप से ओवरहेड डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों (overhead distribution lines) में किया जाता है। जब मुख्य लाइन से सर्विस कनेक्शन के लिए इलेक्ट्रिकल एनर्जी को टैप (tap) करना हो, तब टी-जॉइंट का उपयोग होता है।
ब्रिटानिया जॉइंट (Britannia Joint) 💪
इस जॉइंट का उपयोग ओवरहेड लाइनों में वहां किया जाता है जहाँ बहुत अधिक टेंसाइल स्ट्रेंथ (tensile strength) या मजबूती की आवश्यकता होती है। इसका उपयोग इनडोर और आउटडोर वायरिंग दोनों में उन कंडक्टरों के लिए किया जाता है जिनका व्यास (diameter) 4 मिमी या उससे अधिक होता है।
ब्रिटानिया टी जॉइंट (Britannia Tee Joint) 📐
इस जॉइंट का उपयोग ओवरहेड लाइनों में सर्विस लाइनों के लंबवत (perpendicular) बिजली की टैपिंग (tapping) करने के लिए किया जाता है।
वेस्टर्न यूनियन जॉइंट (Western Union Joint) 📏
इस जॉइंट का उपयोग ओवरहेड लाइनों में तार की लंबाई (length) बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह वहां उपयोगी है जहाँ जॉइंट पर बहुत अधिक खिंचाव या टेंसाइल स्ट्रेस (tensile stress) पड़ता है।
स्कार्फ्ड जॉइंट (Scarfed Joint) ✨
इस जॉइंट का उपयोग बड़े सिंगल कंडक्टरों में किया जाता है जहाँ दिखावट (appearance) और छोटा आकार (compactness) मुख्य प्राथमिकता होती है। इसका उपयोग ऐसी जगहों पर होता है जहाँ अधिक खिंचाव न हो, जैसे कि इनडोर वायरिंग में अर्थ कंडक्टर (earth conductors) के लिए।
📍 सिंगल स्ट्रैंडेड कंडक्टर्स में टैप जॉइंट्स (Tap joints in single stranded conductors)
जब कंडक्टर्स का व्यास (diameter) 2 mm या उससे कम होता है, तो वहां टैप जॉइंट्स का उपयोग किया जाता है।
परिभाषा (Definition): एक टैप जॉइंट का मतलब है किसी एक तार (wire) के सिरे (end) को दूसरे चालू तार (run of another wire) के किसी बिंदु (point) से जोड़ना।
🔹 टैप जॉइंट्स के प्रकार (Types of Taps):
आमतौर पर निम्नलिखित प्रकार के टैप उपयोग किए जाते हैं:
- Plain Tap Joint (साधारण टैप)
- Aerial Tap Joint (एरियल टैप)
- Knotted Tap Joint (नॉटेड/गाँठ वाला टैप)
- Cross – Double – Duplex Tap (क्रॉस – डबल – डुप्लेक्स टैप)
1️⃣ प्लेन टैप जॉइंट (Plain Tap Joint – Fig 8) 🔧
यह जॉइंट सबसे अधिक बार उपयोग (most frequently used) किया जाता है। इसे बनाना बहुत आसान और जल्दी (quickly made) होता है। जॉइंट को अधिक मजबूत और विश्वसनीय (reliable) बनाने के लिए सोल्डरिंग (Soldering) की जाती है।
2️⃣ एरियल टैप जॉइंट (Aerial Tap Joint – Fig 9) 📡
यह जॉइंट उन तारों के लिए बनाया जाता है जहाँ काफी हलचल (considerable movement) होती है। इस उद्देश्य के लिए इसे बिना सोल्डरिंग के छोड़ दिया जाता है। यह low current circuits के लिए उपयुक्त है। यह प्लेन टैप जॉइंट जैसा ही है, बस इसमें टैप वायर को मेन वायर पर थोड़ा ढीला या लंबा ट्विस्ट (long or easy twist) दिया जाता है।
3️⃣ नॉटेड टैप जॉइंट (Knotted Tap Joint – Fig 10) 🪢
एक नॉटेड टैप जॉइंट को भारी tensile stress (खिंचाव) सहने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें तार को एक गाँठ (knot) की तरह बांधा जाता है ताकि खिंचाव पड़ने पर जॉइंट न खुले।
⚡ सोल्डरिंग – प्रकार, फ्लक्स और विधियां (Soldering – Types, Flux and Methods)
❓ सोल्डरिंग क्या है? (What is Soldering?)
सोल्डरिंग दो धातु की प्लेटों या कंडक्टर्स को बिना पिघलाए, एक मिश्र धातु (alloy) की मदद से जोड़ने की प्रक्रिया है। इस मिश्र धातु को सोल्डर (Solder) कहा जाता है, जिसका गलनांक (melting point) मुख्य धातु से कम होता है।
💡 सोल्डरिंग की आवश्यकता क्यों है? (Necessity of Soldering)
तारों और केबल के जॉइंट्स में वही इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी और मैकेनिकल स्ट्रेंथ होनी चाहिए जो मुख्य कंडक्टर में होती है। केवल यांत्रिक जोड़ (mechanical joint) से यह प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसलिए:
- मैकेनिकल स्ट्रेंथ (Mechanical strength) बढ़ाने के लिए।
- अच्छी कंडक्टिविटी (Electrical conductivity) के लिए।
- जंग (Corrosion) से बचाने के लिए।
🧪 सोल्डर के प्रकार (Types of Solders)
इलेक्ट्रीशियन द्वारा उपयोग किए जाने वाले सोल्डर में मुख्य रूप से टिन (Tin) और लेड (Lead) का मिश्रण होता है।
| Designation (नाम) | Composition (मिश्रण) | Working Temp (तापमान) | Uses (उपयोग) | | :— | :— | :— | :— | | Electrician’s Solder | Tin-60%, Lead-40% | 185°C या 365°F | टिनिंग और इलेक्ट्रिकल जॉइंट्स की सोल्डरिंग के लिए। |
कॉपर के लिए सोल्डर (Solder used for copper): तांबे के लिए उपयोग किया जाने वाला सोल्डर मुख्य रूप से टिन और लेड का ही मिश्रण होता है।
🎯 सोल्डर चुनने को प्रभावित करने वाले कारक (Factors influencing the choice of a solder)
सही सोल्डर का चुनाव इन बातों पर निर्भर करता है:
- Melting point (गलनांक)
- Solidification range (जमने की सीमा)
- Strength (मजबूती)
- Hardness (कठोरता)
- Sealability (सील करने की क्षमता)
- Price (कीमत)
🧴 फ्लक्स (Flux) क्या है?
फ्लक्स एक ऐसा पदार्थ है जिसका उपयोग कंडक्टर्स की सतह पर मौजूद ऑक्साइड्स (oxides) को घोलने और सोल्डरिंग के दौरान दोबारा ऑक्सीकरण (re-oxidation) को रोकने के लिए किया जाता है।
✨ फ्लक्स के सामान्य गुण (General properties of flux):
- यह ऑक्साइड और सल्फाइड को हटाकर सतह को साफ करता है।
- यह सोल्डरिंग के दौरान सतह को दोबारा ऑक्सीकृत होने से रोकता है।
- यह सोल्डर के बहाव (flow) को आसान बनाता है ताकि वह सतह में गहराई तक जा सके।
सोल्डरिंग और फ्लक्स की जानकारी (Soldering and Flux Information) 📋
सोल्डर का प्रकार (Type of solder) अक्सर यह निर्धारित करता है कि सोल्डरिंग के लिए किस फ्लक्स (Flux) का उपयोग किया जाना है।
नीचे दी गई तालिका सोल्डरिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले फ्लक्स (Fluxes) को सूचीबद्ध करती है:
तालिका (Table): फ्लक्स और सोल्डर का चयन
| क्रम संख्या (Sl. No.) | उपयुक्त फ्लक्स (Suitable flux) | धातु/कार्य – जिसके लिए उपयोग किया जाता है (Metals/job – used for) | सोल्डर का प्रकार (Type of solder) | | :— | :— | :— | :— | | 1 | साल अमोनिया रोज़िन (Sal ammonia rosin) – (पूरी तरह से एसिड-मुक्त नहीं) | कॉपर (Copper), पीतल (Brass), टिन प्लेट (Tin plate), गन-मेटल (Gun-metal): सफाई और बेहतर सोल्डरिंग कार्य के लिए। | कोर्स सोल्डर (Coarse solder) | | 2 | रोज़िन (Rosin) | इलेक्ट्रिकल कंडक्टरों को जोड़ने के लिए (Joining electrical conductors)। | इलेक्ट्रीशियन का सोल्डर (Electrician’s solder) | | 3 | टालो – तारपीन, एसिड-मुक्त (Tallow – turpentine, acid-free) | सोल्डरिंग के लिए इलेक्ट्रिकल कंडक्टरों को जोड़ने के लिए। | इलेक्ट्रीशियन का फाइन सोल्डर (Electrician’s fine solder) |
सोल्डरिंग की विधियाँ (Soldering Methods) 🛠️
सोल्डरिंग आयरन के साथ सोल्डरिंग (Soldering with a soldering iron):
सोल्डरिंग की सबसे सामान्य विधि सोल्डरिंग आयरन (Soldering iron) के साथ सोल्डरिंग करना है, जैसा कि Fig 1 में दिखाया गया है। इसका उपयोग ज्यादातर सॉफ्ट सोल्डरिंग (Soft soldering) कार्यों के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।
- यह टूल (Tool) सरल और सस्ता (Inexpensive) है।
- सोल्डरिंग आयरन विभिन्न प्रकार के आकार (Sizes) और मॉडल (Models) में उपलब्ध हैं।
तापमान नियंत्रित सोल्डरिंग (Temperature controlled soldering):
प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (Printed Circuit Boards – P.C.B.) पर सूक्ष्म घटकों (Miniature components) को सोल्डर करने के लिए, तापमान-नियंत्रित सोल्डरिंग आयरन (Temperature-controlled soldering iron) का उपयोग किया जाता है, जैसा कि Fig 2 में दिखाया गया है।
- सोल्डरिंग आयरन को दी जाने वाली विद्युत आपूर्ति (Electrical supply) मुख्य आपूर्ति (Main supply) से पूरी तरह अलग (Isolated) होती है।
- यह कम वोल्टेज (Low voltage) पर काम करता है, जो उपयोगकर्ता (User) के जीवन को खतरे में नहीं डालता है और संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक घटकों (Sensitive electronic components) को भी खराब नहीं करता है।
- नियंत्रित तापमान (Controlled temperature) उपयोगकर्ता के लिए काम को आसान बनाता है। 🌡️
सोल्डरिंग गन के साथ सोल्डरिंग (Soldering with a soldering gun):
यह विधि, जो Fig 3 में दिखाई गई है, व्यक्तिगत सोल्डरिंग (Individual soldering) के लिए उपयोग की जाती है, जैसे कि सर्विसिंग और मरम्मत कार्य (Servicing and repair work) के लिए।
- सिद्धांत (Principle): इस विधि का सिद्धांत यह है कि एक तार की कुंडली (Wire coil) के माध्यम से विद्युत धारा (Electric current) प्रवाहित होती है जो इसे गर्म करती है।
- नुकसान (Disadvantage): तापमान की जांच करना मुश्किल है, और ओवरहीटिंग (Overheating) आसानी से हो सकती है। यही इसकी मुख्य कमी है। ⚡
लौ के साथ सोल्डरिंग (Soldering with a flame):
ज्वाला या लौ के साथ सोल्डरिंग (Soldering with a flame) तब की जाती है जब सोल्डरिंग आयरन की ऊष्मा क्षमता (Heat capacity) अपर्याप्त होती है।
- यह विधि, जो Fig 4 में दिखाई गई है, तेजी से गर्म (Rapid heating) होने देती है और मुख्य रूप से बड़े कार्यों के लिए उपयोग की जाती है, जैसे कि पाइपिंग और केबल वर्क (Piping and cable work), वाहन बॉडी की मरम्मत (Vehicle body repairs) और भवन निर्माण (Building trade) के कुछ अनुप्रयोगों में।
- इस विधि के लिए लौ के कुशल प्रबंधन (Skilful management of the flame) की आवश्यकता होती है। 🔥
डिप सोल्डरिंग (Dip soldering):
यह विधि, जिसे Fig 5 में दिखाया गया है, मात्रा उत्पादन (Quantity production) और टिनिंग कार्य (Tinning work) के लिए उपयोग की जाती है, जो कि P.C.B. के घटकों को सोल्डर करने के समान है।
- जिन घटकों को सोल्डर या टिन करना होता है, उन्हें पिघले हुए सोल्डर (Molten solder) के स्नान (Bath) में डुबोया जाता है, जिसे विद्युत रूप से गर्म किया जाता है।
- तापमान को बहुत सटीक रूप से नियंत्रित (Controlled accurately) किया जा सकता है।
मशीन सोल्डरिंग (Machine soldering):
यह विधि मात्रा उत्पादन (Quantity production) के लिए उपयोग की जाती है, और यह इस सिद्धांत पर आधारित है कि पिघला हुआ सोल्डर (Molten solder) उत्पादन में उपयोग किया जाता है। 🤖
Techniques of Soldering (सोल्डरिंग की तकनीकें) ⚙️
सोल्डरिंग की प्रक्रिया में मुख्य रूप से निम्नलिखित ऑपरेशन्स (operations) शामिल होते हैं:
- Tinning the soldering iron: सोल्डरिंग आयरन की टिनिंग करना।
- Cleaning the parts to be soldered: जिन हिस्सों को सोल्डर करना है, उनकी सफाई करना।
- Applying the solder: सोल्डर लगाना।
1. Tinning the soldering iron (सोल्डरिंग आयरन की टिनिंग करना) 🖌️
सोल्डर (solder) को सोल्डरिंग आयरन की टिप (tip) पर सही से चिपकाने के लिए, टिप की सतह पर सोल्डर की एक पतली परत चढ़ाई जाती है, जिसे Tinning कहा जाता है।
- सबसे पहले, टिप को कपड़े (cloth) से साफ किया जाता है और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गर्म किया जाता है।
- इसके बाद, टिप को File (रेती) से रगड़ा जाता है ताकि ऑक्सीडेशन की परत (scales) हट जाए, और फिर से कपड़े से पोंछा जाता है।
- टिनिंग के लिए सही तापमान (right temperature) का अंदाजा गर्म होने पर टिप के बदलते रंग से लगाया जा सकता है।
- यदि कॉपर टिप की सतह काली (tarnishes) पड़ जाती है, तो तापमान बहुत अधिक है और उसे ठंडा करने की जरूरत है। सही तापमान पर गर्म होने पर टिप धीरे-धीरे काली पड़ती है।
- जब सोल्डरिंग आयरन सही तापमान पर पहुँच जाए, तो एक टिन प्लेट (tin plate) पर थोड़ा सा सोल्डर और फ्लक्स (flux) रखें और टिप को उस पर रगड़ें। सोल्डर टिप की सतह पर समान रूप से चिपकना चाहिए।
- फालतू सोल्डर को एक साफ नम कपड़े (damp cloth) से पोंछ दें।
टिनिंग की पूरी प्रक्रिया को Figure 6 में दिखाया गया है। सही ढंग से टिनिंग होने पर टिप Bright Silvery Appearance (चमकदार चांदी जैसी) दिखनी चाहिए।
2. Cleaning the surface to be soldered (सतह की सफाई करना) 🧽
बेहतरीन सोल्डरिंग के लिए उन हिस्सों को अच्छी तरह साफ करना चाहिए जिन्हें सोल्डर किया जाना है।
- सतह से धूल, मिट्टी, तेल, ग्रीस और ऑक्सीडेशन (scales) को पूरी तरह हटा देना चाहिए।
- इसके लिए सतह को कपड़े से पोंछें या Sandpaper (रेगमाल) से रगड़कर साफ करें।
- सफाई के तुरंत बाद सतह पर Flux लगाना चाहिए ताकि दोबारा ऑक्सीडेशन (oxidation) न हो।
3. Applying the flux (फ्लक्स लगाना) 🧴
- अनुशंसित (recommended) Rosin या फ्लक्स को सोल्डर की जाने वाली सतह पर छिड़का जा सकता है या Figure 7 में दिखाए अनुसार ब्रश (brush) से लगाया जा सकता है।
4. Applying the solder (सोल्डर लगाना) ⚡
- सोल्डर की मात्रा काम (job) के प्रकार पर निर्भर करती है।
- छोटे कामों जैसे Printed Circuit Boards (PCB) या पतले तारों के जोड़ों के लिए 2mm व्यास (diameter) या उससे कम के सोल्डर वायर और Electric Soldering Iron का उपयोग किया जाता है।
- बड़े साइज के केबल्स (large sized cables) के लिए Pot and Ladle (बर्तन और करछुल) का उपयोग किया जाता है।
5. Soldering precautions (सोल्डरिंग के दौरान सावधानियां) ⚠️
- जैसे ही सोल्डर सतह पर अच्छी तरह फैल जाए, सोल्डरिंग आयरन को तुरंत हटा लें।
- Excessive heating (अत्यधिक गर्मी) से निम्नलिखित नुकसान हो सकते हैं:
- तार (wire) और उसका इंसुलेशन (insulation) खराब हो सकता है।
- जिस कंपोनेंट को सोल्डर किया जा रहा है, वह डैमेज हो सकता है।
- आस-पास के अन्य कंपोनेंट्स (adjoining components) को नुकसान पहुँच सकता है।
6. Soldering with pot and ladle (पॉट और लैडल के साथ सोल्डरिंग) 🥣
Figure 8 के अनुसार: बड़े कामों जैसे Underground Cable Jointing के लिए ‘मेल्टिंग पॉट’ (melting pot) और ‘लैडल’ (ladle) का उपयोग किया जाता है।
- सोल्डर को एक पॉट (pot) में रखा जाता है और उसे ब्लो-लैंप (blowlamp) या चारकोल (charcoal) से गर्म किया जाता है।
- शुरुआत में सतह को साफ करके फ्लक्स की एक परत लगाई जाती है।
- फिर जिस सतह को सोल्डर करना है, उस पर बार-बार पिघला हुआ सोल्डर (molten solder) डाला जाता है।
- लगातार सोल्डर डालने से सतह का तापमान भी पिघले हुए सोल्डर के समान हो जाता है।
- इसके बाद फिर से फ्लक्स लगाया जाता है और सोल्डर को धीरे-धीरे डाला जाता है ताकि एक समान परत (even layer) बन सके।
- ट्रे (clean tray) में इकट्ठा हुए फालतू सोल्डर को वापस पॉट में डालकर दोबारा पिघलाया जाता है।
🛠️ एल्युमीनियम केबल्स की सोल्डरिंग (Soldering of Aluminium Cables): पूरी जानकारी
स्वागत है छात्रों! आज हम सीखेंगे कि Aluminium Cables की सोल्डरिंग कैसे की जाती है। एल्युमीनियम की सोल्डरिंग करना कॉपर (Copper) की तुलना में थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सही तकनीक और सामग्री के साथ इसे आसानी से किया जा सकता है।
📌 एल्युमीनियम केबल्स की सोल्डरिंग (Soldering of aluminium cables)
एल्युमीनियम कंडक्टर्स (Aluminium conductors) की सोल्डरिंग करना कॉपर कंडक्टर्स की तुलना में अधिक कठिन (difficult) होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि जैसे ही एल्युमीनियम हवा (air) के संपर्क में आता है, इस पर एक बहुत ही मजबूत और स्थिर ऑक्साइड फिल्म (oxide film) बन जाती है।
यह ऑक्साइड फिल्म सोल्डर को सतह (surface) पर चिपकने नहीं देती और कैपिलरी एक्शन (capillary action) के जरिए सोल्डर को अंदर जाने से रोकती है। इसलिए, एल्युमीनियम सोल्डरिंग के लिए विशेष सोल्डर्स और फ्लक्स (special solders and fluxes) का उपयोग किया जाता है।
🔩 सोल्डर (Solder)
एल्युमीनियम कंडक्टर्स को जोड़ने के लिए एक विशेष सोल्डर का उपयोग किया जाता है जिसमें जिंक (Zinc) का कुछ प्रतिशत होता है। (सॉफ्ट सोल्डर वे मिश्र धातु/alloys हैं जिनका गलनांक (melting point) 300°C से नीचे होता है।) IS 5479-1985 में इन सॉफ्ट सोल्डर्स की रासायनिक संरचना (chemical composition) के बारे में विस्तार से बताया गया है।
जिंक की मात्रा का मुख्य उद्देश्य एल्युमीनियम की सतह के साथ सोल्डर का Alloying (मिश्रण) आसान बनाना है। एक सामान्य सोल्डर में 51% लेड (lead), 31% टिन (tin), 9% जिंक (zinc) और 9% कैडमियम (cadmium) होता है, जिसे बाज़ार में ‘ALCAP’ ब्रांड के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा, ‘Ker-al-lite’ नामक विशेष सोल्डर भी उपलब्ध है।
🧪 फ्लक्स (Flux)
एल्युमीनियम कंडक्टर्स की सोल्डरिंग में, रिएक्शन टाइप (reaction type) के ऑर्गेनिक फ्लक्स (organic fluxes) का उपयोग किया जाता है, जो क्लोराइड मुक्त होते हैं।
इन ऑर्गेनिक फ्लक्स का मिश्रण लगभग 250°C पर विघटित (decompose) हो जाता है ताकि ऑक्साइड फिल्म को हटाया जा सके और सोल्डर को सतह पर आसानी से फैलने (tinning) में मदद मिल सके।
नुकसान: ऑर्गेनिक फ्लक्स का मुख्य नुकसान यह है कि यह 360°C से ऊपर के तापमान पर Char (जलकर काला होना) होने लगता है। इस कारण फ्लक्स बेअसर हो जाता है और जोड़ (joint) में रिक्तियां (voids) बन सकती हैं। इसलिए सोल्डरिंग के दौरान तापमान को 360°C के भीतर रखना बहुत महत्वपूर्ण है। व्यावसायिक रूप से उपलब्ध फ्लक्स के नाम ‘Kynal Flux’ और ‘Eyre No.7’ हैं।
📝 एल्युमीनियम केबल्स को सोल्डर करने की प्रक्रिया (Procedure)
मानक कॉपर लग्स (copper lugs) के साथ एल्युमीनियम केबल्स को सोल्डर करने की प्रक्रिया नीचे दी गई है:
- ✂️ Strip the cable: जोड़ बनाने की तैयारी के लिए सामान्य तरीके से केबल को स्ट्रिप करें।
- 🖌️ Spread the strands: स्ट्रैंड्स को थोड़ा फैला दें और उन्हें वायर ब्रश (wire brush) से साफ करें।
- 🧴 Apply Flux: फ्लक्स को ब्रश से अच्छी तरह स्ट्रैंड्स पर लगाएं और पिघले हुए सोल्डर (molten solder) से उसे भिगोएँ।
- 🏗️ Repeat Process: अधिक फ्लक्स लगाएं और फिर से पिघला हुआ सोल्डर डालें। तब तक दोहराएं जब तक स्ट्रैंड्स की सतह चमकने न लगे।
- 🧼 Wipe Surplus: अंतिम बार लेपन (basting) के बाद, एक साफ और सूखे कपड़े से अतिरिक्त धातु को पोंछ दें।
- 🕳️ Flux the Lug: लग (lug) की आंतरिक सतह पर फ्लक्स लगाएं और इसे पिघले हुए सोल्डर से भरें।
- 🔌 Insert Cable: केबल के टिन किए हुए सिरे को लग के अंदर डालें और बिना हिलाए मजबूती से पकड़ें।
- ❄️ Cooling: लग को ठंडा होने दें और अतिरिक्त सोल्डर को हटाने के लिए सतह को जल्दी से पोंछें।
- 🧽 Clean surface: लग की सतह को साफ कपड़े से पोंछें।
- 🛡️ Graphite Grease: उपयोग करने से पहले लग पर ग्रेफाइट कंडक्टिंग ग्रीस (graphite conducting grease) की एक कोटिंग लगाएं।
⚠️ सावधानियां और सुरक्षा (Precautions and Safety)
सावधानी (Precautions):
- सभी सतहें (surfaces) बिल्कुल साफ होनी चाहिए। 🧼
- जब स्ट्रैंडेड कंडक्टर्स के बीच जोड़ बनाया जा रहा हो, तो सतह क्षेत्र (surface area) बढ़ाने के लिए स्ट्रैंड्स को ‘stepped’ किया जाना चाहिए।
- गर्मी (heat) देने से पहले सतह पर फ्लक्स लगाना अनिवार्य है।
सुरक्षा (Safety):
- सोल्डरिंग के दौरान फ्लक्स गर्म होने पर बहुत अधिक धुआं (fumes) निकलता है। इसमें फ्लोरीन (fluorine) की कुछ मात्रा होती है, इसलिए इसे सांस के जरिए अंदर न लें। 😷
- सोल्डरिंग के दौरान धूम्रपान (smoking) करने से जहरीला धुआं शरीर के अंदर जा सकता है, इससे बचें।
📊 तालिका 1: सोल्डर ग्रेड और संरचना (Table 1)
| Grade | % of alloying elements (Zinc/Lead/Tin) | Melting temp. in °C | Flux type | Applications | | :— | :— | :— | :— | :— | | SnPb53Zn | 1.75–2.25 (Zn), 52–54 (Pb), 45.71–45.21 (Sn) | 170–215 | Organic | Conductors of electrical cables | | SnPb58Zn | 1.75–2.25 (Zn), 57–59 (Pb), 40.66–40.6 | 175–220 | Organic | -do- |
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Instructor Note: छात्रों, ध्यान दें कि सोल्डरिंग करते समय टिप की सफाई और सही तापमान का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण है। अधिक गर्मी से सर्किट बोर्ड जल सकता है।
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Instructor Note: छात्रों को चित्रों (Fig 1, 2, 3, 4) के माध्यम से प्रत्येक उपकरण की पहचान करना सिखाएं ताकि वे प्रैक्टिकल के दौरान सही टूल का चुनाव कर सकें।
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नोट: यह पाठ इलेक्ट्रीशियन के छात्रों को वायर जॉइंट्स की बुनियादी समझ देने के लिए तैयार किया गया है। चित्र (Diagrams) के लिए मूल दस्तावेज के फिगर नंबर 1 से 7 का संदर्भ लें।