⚡ पावर फैक्टर – पावर फैक्टर में सुधार (Power Factor – Improvement of Power Factor)
पावर (Power) – इलेक्ट्रिशियन (Electrician) – ए.सी. सर्किट (A.C. Circuit) अभ्यास 1.5.50 और 51 के लिए संबंधित सिद्धांत (Related Theory for Exercise 1.5.50 & 51)
🎯 उद्देश्य (Objectives):
इस पाठ के अंत में आप निम्नलिखित कार्यों में सक्षम होंगे:
- पावर फैक्टर (Power Factor) को परिभाषित करना और कम पावर फैक्टर के कारणों की व्याख्या करना।
- सर्किट में कम पावर फैक्टर के नुकसान (Disadvantages) और उच्च पावर फैक्टर के लाभों की सूची बनाना।
- ए.सी. सर्किट (AC circuit) में पावर फैक्टर सुधारने की विधियों को समझाना।
- उद्योगों में पावर फैक्टर सुधार के महत्व को स्पष्ट करना।
- Leading, Lagging और Zero PF के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- विद्युत उपकरणों के लिए ISI 7752 (Part I) 1975 के अनुसार अनुशंसित पावर फैक्टर बताना।
🔍 पावर फैक्टर (Power Factor – P.F.)
पावर फैक्टर को True Power (वास्तविक शक्ति) और Apparent Power (आभासी शक्ति) के अनुपात (Ratio) के रूप में परिभाषित किया जाता है और इसे Cos θ द्वारा दर्शाया जाता है।
$$i.e. Power Factor = \frac{True Power (W_T)}{Apparent Power (W_a)} = Cos \theta$$
$$or Cos \theta = \frac{W_T}{V \times I}$$
जहाँ $W_T$ वास्तविक शक्ति (Real Power/True Power) है और इसे Watts या कभी-कभी Kilowatts (kW) में मापा जाता है। इसी तरह, गुणनफल $V \times I$ को Apparent Power के रूप में जाना जाता है, जिसे Volt Amperes (VA) या कभी-कभी Kilo-volt Amperes (kVA) में मापा जाता है।
लो पावर फैक्टर (Low Power Factor) का मुख्य कारण सर्किट में बहने वाली Reactive Power है। यह रिएक्टिव पावर ज्यादातर कैपेसिटिव लोड (Capacitive load) के बजाय Inductive Load के कारण होती है। 📉
🔄 पावर फैक्टर में बदलाव और सर्किट के प्रकार (Variation in Power factor and the type of circuits)
विभिन्न सर्किटों में पावर फैक्टर की अलग-अलग स्थितियां निम्नलिखित हैं:
1. यूनिटी पावर फैक्टर (Unity Power Factor): 📏 एक यूनिटी पावर फैक्टर वाले सर्किट में Real Power और Apparent Power बराबर होती है, जिससे करंट वोल्टेज के साथ In Phase (एक ही फेज में) रहता है, और इसलिए, कुछ उपयोगी कार्य किया जा सकता है। (चित्र 1a)
2. लीडिंग पावर फैक्टर (Leading Power Factor): ⬆️ एक सर्किट में लीडिंग पावर फैक्टर तब होता है जब करंट वोल्टेज से $q$ इलेक्ट्रिकल डिग्री के कोण से आगे (Leads) होता है और True Power, Apparent Power से कम होती है। ज्यादातर कैपेसिटिव सर्किट और ओवर-एक्साइटेशन (Over excitation) पर चलने वाली सिंक्रोनस मोटरें लीडिंग पावर फैक्टर में योगदान करती हैं। (चित्र 1b)
3. लैगिंग पावर फैक्टर (Lagging Power Factor): ⬇️ ऐसे सर्किट में True Power, Apparent Power से कम होती है और करंट वोल्टेज से इलेक्ट्रिकल डिग्री के कोण से पीछे (Lags) रहता है। इंडक्शन मोटर और इंडक्शन फर्नेस (Induction furnaces) जैसे अधिकांश इंडक्टिव लोड लैगिंग पावर फैक्टर के लिए जिम्मेदार होते हैं। (चित्र 1c)
4. जीरो पावर फैक्टर (Zero Power Factor): 0️⃣ जब करंट और वोल्टेज के बीच $90^\circ$ का फेज अंतर (Phase difference) होता है, तो सर्किट का पावर फैक्टर शून्य होगा और कोई उपयोगी कार्य नहीं किया जा सकेगा। शुद्ध इंडक्टिव (Pure inductive) या शुद्ध कैपेसिटिव (Pure capacitive) सर्किट जीरो पावर फैक्टर के लिए जिम्मेदार होते हैं। (चित्र 1d)
⚠️ महत्वपूर्ण नोट: पावर फैक्टर एक (1) या उससे कम हो सकता है, लेकिन यह कभी भी एक से अधिक (greater than one) नहीं हो सकता।
📉 कम पावर फैक्टर के कारण (Causes of low power factor)
इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में Induction Motors का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इंडक्शन मोटर हमेशा लैगिंग करंट (Lagging current) लेती हैं, जिसके परिणामस्वरूप पावर फैक्टर कम हो जाता है।
- औद्योगिक Induction Furnaces का पावर फैक्टर कम होता है।
- सब-स्टेशनों पर Transformers में इंडक्टिव लोड और मैग्नेटाइजिंग करंट (Magnetising currents) के कारण लैगिंग पावर फैक्टर होता है।
- घरों में इंडक्टिव लोड जैसे Fluorescent tubes, mixers, fans आदि।
❌ कम पावर फैक्टर के नुकसान (The disadvantages of low power factor)
कम पावर फैक्टर के नुकसान इस प्रकार हैं:
- A. दी गई True Power के लिए, कम पावर फैक्टर के कारण करंट बढ़ जाता है, जिससे केबल, जनरेटर, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों और ट्रांसफार्मर पर Overloading हो जाती है।
- B. वोल्टेज ड्रॉप और सप्लाई सिस्टम में पावर लॉस के कारण उपयोग के बिंदु पर लाइन वोल्टेज कम हो जाता है (Consumer end पर वोल्टेज की कमी)।
-
C. Penal power rates (बिजली बिल में जुर्माना): अगर आपका Power Factor कम है, तो बिजली विभाग आप पर जुर्माना (Penalty) लगा सकता है, जिससे बिजली का बिल बढ़ जाता है।
High Power Factor के फायदे निम्नलिखित हैं: ✅ एक निश्चित लोड के लिए Power Factor जितना अधिक होगा, करंट (Current) उतना ही कम होगा। इसके फायदे ये हैं:
- a) मौजूदा जनरेटरों (Generators) पर एक्स्ट्रा लोड जोड़ने की संभावना रहती है और उन्हीं लाइनों के माध्यम से अतिरिक्त पावर ट्रांसमिट की जा सकती है। 🔌
- b) लाइनों में कम नुकसान (Lesser losses) और वोल्टेज ड्रॉप (Voltage drop) कम होता है; जिससे ट्रांसमिशन दक्षता (Efficiency) बढ़ जाती है और एप्लीकेशन पॉइंट पर बिना किसी खास गिरावट के वोल्टेज नॉर्मल रहता है।
- c) नॉर्मल वोल्टेज होने से प्लांट और मशीनों के संचालन की दक्षता (Efficiency) में सुधार होता है। ⚙️
- d) एक निश्चित समय के दौरान दिए गए लोड के लिए बिजली के बिलों (Electricity bills) में कमी आती है। 💰
🛠️ Power Factor सुधारने के तरीके (Methods of Improving Power Factor)
सर्किट के Power Factor को सुधारने के लिए मुख्य रूप से दो तरीकों का उपयोग किया जाता है:
- i) उस लाइन पर ओवर-एक्साइटेशन (Over-excitation) के साथ हल्का लोड वाला Synchronous Motor चलाना, जिसमें PF को बेहतर बनाना है।
- ii) लोड के साथ पैरेलल (Parallel) में Capacitors जोड़ना। 🔋
नोट: आमतौर पर भारतीय फैक्ट्रियों में ‘Capacitor Method’ का ही उपयोग किया जाता है।
🔄 Synchronous Condenser विधि (Synchronous Condenser Method)
Synchronous motor का उपयोग कुछ खास उद्योगों के साथ-साथ रिसीविंग एंड सबस्टेशनों (Receiving end substations) में मैकेनिकल लोड चलाने और Power Factor को ठीक करने के लिए किया जाता है।
- एक Over-excited synchronous motor, लीडिंग करंट (Leading current) खींचता है ताकि अन्य लोड द्वारा लिए गए लैगिंग करंट (Lagging current) की भरपाई (Compensate) की जा सके। ⚡
- जब एक synchronous motor ओवर-एक्साइटेड होती है, तो इसके द्वारा ली गई Leading volt-ampere reactive power, इंडक्टिव लोड (Inductive loads) के कारण होने वाली लैगिंग रिएक्टिव पावर के विपरीत होती है। इस प्रकार, यह Power Factor को सुधारने के लिए वोल्ट-एम्पीयर रिएक्टिव कंपोनेंट को कम कर देता है।
🔋 Condenser (Capacitor) विधि (Condenser Method)
जब PF सुधार के लिए कैपेसिटर (Capacitors) का उपयोग किया जाता है, तो उन्हें सप्लाई के पैरेलल (Parallel) जोड़ा जाता है।
- Three-phase circuits में, कैपेसिटर लोड लाइनों के आर-पार Delta में जुड़े होते हैं। 🔼
- आजकल Automatic devices उपलब्ध हैं जिन्हें सप्लाई लाइनों से जोड़ा जा सकता है। ये डिवाइस कम पावर फैक्टर का पता लगाते हैं और PF सुधारने के लिए लाइन में आवश्यक क्षमता के कैपेसिटर को स्वचालित रूप से स्विच ऑन कर देते हैं।
- आमतौर पर इन कैपेसिटर्स में जमा ऊर्जा को डिस्चार्ज करने के लिए Discharge resistances दिए जाते हैं। हालांकि, बिजली के झटके (Shock) से बचने के लिए किसी भी कैपेसिटर टर्मिनल को कभी नहीं छूना चाहिए। ⚠️
📊 TABLE 1: सिंगल फेज इलेक्ट्रिकल उपकरणों का Power Factor
(Reference IS 7752 (Part I) – 1975)
| Sl.No. | Appliance/Equipment (उपकरण) | Power Output Min. (W) | Power Output Max. (W) | Average natural PF (औसत पावर फैक्टर) | | :— | :— | :— | :— | :— | | 1 | Neon sign | 500 | 5000 | 0.5 to 0.55 | | 2 | Window type air-conditioners | 750 | 2000* | 0.75 to 0.85, 0.68 to 0.82, 0.62 to 0.65 | | 3 | Mixer | 150 | 450 | 0.8 | | 4 | Coffee grinder | 200 | 400 | 0.75 | | 5 | Refrigerator | 200 | 800 | 0.65 | | 6 | Freezer | 600 | 1000 | 0.7 |
📝 असाइनमेंट (Assignment) ✍️
एक फैक्ट्री में 100 kW का लोड 0.6 PF lagging पर काम कर रहा है। फैक्ट्री में Power factor सुधारने के लिए एक Synchronous motor जोड़ी गई है और उसे ओवर-एक्साइटेड (Over-excited) चलाया जाता है। Synchronous motor 30 kW की है और 0.8 PF leading पर काम कर रही है। निम्नलिखित की गणना करें:
- i) 0.6 p.f. lagging पर फैक्ट्री लोड के लिए True power (Watt में) और Apparent power (VAR में)।
- ii) 0.8 P.F. leading पर Synchronous motor के लिए True power (Watt में), Apparent power (Volt-ampere में) और Leading reactive power (VAR में)।
- iii) फीडर लाइनों द्वारा सप्लाई की गई कुल True power (Watt में), Reactive power (VAR में), Apparent power (Volt-ampere में) और कुल PF।
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Note to Instructor: छात्रों को समझाते समय चित्र 1a से 1d (Phase relationships) का संदर्भ अवश्य दें ताकि वे वोल्टेज और करंट के बीच के फेज अंतर को समझ सकें।